आज़मगढ़ में शान्ति भंग के खतरे के नाम पर प्रशासन की प्रतिशोधात्मक कार्रवार्इ,
विकलांगों को भी नहीं बखशा
मसीहुद्दीन संजरी
आज़मगढ़। दंगे जैसे हालात पैदा हो जाने पर शान्ति भंग की आशंका में पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर पाबंद करना एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। परंतु शान्ति बहाली के बाद बड़े पैमाने पर यह कार्रवाई, जिसमें बूढ़ों और विकलांगों को भी शामिल रखा जाए, तो वह कानून व्यवस्था का मामला कम प्रतिशोध की कार्रवाई ज़्यादा लगती है। इसी क्रम में ग्राम दाऊदपूर, जनपद आज़मगढ़ से शान्ति भंग का नोटिस पाने वाले 128 लोगों में चार विकलांग भी शामिल हैं। इसके अलावा कई ऐसे लोगों के नाम भी हैं जो घटना से पहले से ही अपनी रोज़ी–रोटी के सम्बंध में विदेशों में हैं।
आज़मगढ़ के ग्राम खोदादादपूर में 14 मई को दो पक्षों बीच फायरिंग और आगज़नी के बाद साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा अगले दिन उक्त गांव पर नाकाम हमले के बाद स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है। लेकिन प्रशासन द्वारा सैकड़ों की संख्या में लोगों को शान्ति भंग के नाम पर धारा 107/116/111 के अंतर्गत पाबंद किए जाने से जनता में बेचैनी का माहौल बन गया है। पाबंद किए जाने वालों में बड़ी संख्या मुसलमानों और हरिजनों की है। खास बात यह है कि इसमें उन गांवों को भी निशाना बनाया गया है जहां किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई है।
ऐसा ही एक गांव है दाऊदपुर जहां कोई घटना नहीं हुई, लेकिन गांव से कुल 128 लोगों को शान्ति भंग की उक्त धाराओं में नोटिस जारी किया गया है जिसमें चार विकलांगों के नाम भी शामिल हैं। अतीकुर्रहमान पुत्र अब्दुर्रहमान मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से विकलांग है। वह न तो चल सकता है, न बोल सकता है और खुद से खाना भी नहीं खा सकता। सादिक पुत्र इफतेखार के दोनों पैर और दाहिना हाथ बचपन से ही पोलियोग्रस्त है, वह तिपहिया रिक्शा से चलता है। जफर आलम पुत्र तुफेल अहमद चालीस प्रतिशत विकलांग है तो बबलू विश्वकर्मा पुत्र मटरू विश्वकर्मा एक एक पैर से विकलांग हैं, जिनके लिए सामान्य चाल से भी थोड़ी दूर चलना मुश्किल है। लेकिन प्रशासन की नज़र में इन विकलांगों से भी शान्ति भंग का खतरा है।
स्थानीय जनता का आरोप है कि प्रशासन ने अराजक तत्वों को चिन्हित कर कार्रवाई करने के बजाए वोटर लिस्ट से नाम निकाले और नोटिस जारी कर दिया। उनका तर्क है कि जिन गांवों में शान्ति भंग का नोटिस दिया गया है उनमें ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जो पहले से ही विदेशों में हैं। स्वयं ग्राम दाऊदपुर में कम से कम 6 लोग ऐसे हैं जो विदेशों में हैं और उनका नाम सूची में मौजूद है। इसके अलावा ऐसे लोगों के नाम भी हैं जो पढ़ाई या रोज़गार के सिलसिले में दिल्ली, मुम्बई या अन्य महानगरों में हैं।
प्रशासन की इस कारवाई से जहां एक ओर जनता में बेचैनी है वहीं दूसरी तरफ गरीब वर्ग इस बात को लेकर परेशान है कि वह ज़मानत के लिए प्रति व्यक्ति दो चार पहिया वाहन या दो खतौनियों का प्रबंध कैसे कर पाएंगे।
आम जन का मानना है कि प्रशासन ने शान्ति भंग के नाम यह कार्रवाई शान्ति व्यवस्था को किसी वास्तविक खतरे के मद्दे नज़र नहीं बल्कि प्रतिशोध के रूप में जनता को परेशान करने के लिए की है।