न्यायालय का सम्मान करे सरकार, वनाधिकार के तहत दें पट्टा — दिनकर
अनपरा, सोनभद्र, 27 जून 2016। 14 जुलाई को प्रदेश में वृहद् वृक्षारोपण के जरिए गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में उ0 प्र0 के मुख्यमंत्री का नाम दर्ज कराने की मुहिम के लिए सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ के आदिवासियों और वनाश्रित जातियों के लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन से उजाड़ा जा रहा है। हालत इतनी बुरी है कि कई गांवों के आदिवासियों और वनाश्रित जातियों के लोगों को वन विभाग के लोग रेंज आफिसों में लाकर बुरी तरह मार रहे हैं और उन पर मुकदमे कायम कर जेल भेज रहे हैं।
यह आरोप म्योरपुर विकास खण्ड के गांव रणहोर में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों द्वारा आदिवासियों को उजाड़े जाने व उनकी अनपरा रेंज आफिस में की गयी बर्बर पिटाई की कल जांच करने के बाद आज आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के प्रदेश संगठन महासचिव दिनकर कपूर ने प्रेस को जारी बयान में लगाया।
आइपीएफ की टीम में ठेका मजदूर यूनियन अध्यक्ष सुरेन्द्र पाल, पूर्व प्रधान नीरू खरवार, रमेश सिंह खरवार, शारदा प्रसाद तिवारी, तेजधारी गुप्ता व सुभाष केवट शामिल रहे।

मुख्यमंत्री को आइपीएफ ने भेजा पत्र
वन विभाग द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर आज आइपीएफ के प्रदेश संगठन महासचिव दिनकर कपूर ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। रणहोर की घटना के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए पत्र में कहा गया कि 21 मई को वहां वन विभाग के लोगों ने बैगा और अगरिया जाति के हरकिशुन, मोहन बैगा, शिवभजन अगरिया, रामवृक्ष अगरिया, छोटेलाल बैगा, नाहर बैगा, राम लल्लू बैगा, दयाराम समेत दर्जनों लोगों के पुश्तैनी मकान को जेसीबी मशीन लगाकर तोड़वा दिया और उनके पुश्तैनी खेतों को जोतकर वहां सुरक्षा खाई व ट्रेंच का निर्माण करा दिया। इनमें से सभी लोगों ने वनाधिकार कानून के तहत अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार के लिए उपजिलाधिकारी दुद्धी के यहां दावे कर रखे हैं। इनमें से शिवभजन अगरिया पुत्र पहलू और रामवृक्ष अगरिया पुत्र पीताम्बर को डेढ़ बीघा जमीन पर अधिकार भी मिला हुआ था और बाकी लोगों के दावों का निस्तारण आज तक नहीं हुआ है। वनाधिकार कानून में यह प्रावधान है कि बिना दावों के निस्तारण और दावाकर्त्ता को युक्तियुक्त अवसर दिए जमीन से बेदखल नहीं किया जायेगा। बावजूद इसके इन सभी को उजाड़ दिया गया।
इतना ही नहीं हंसू बैगा के पुत्र छोटेलाल बैगा, नाहर बैगा और राम लल्लू बैगा को रेंज आफिस अनपरा में लाकर बुरी तरह मारा पीटा गया, जिसमें से राम लल्लू बैगा के मुंह से खून तक आ गया। इन पर मुकदमे भी कायम करा दिए गए। वन विभाग द्वारा उत्पीड़न की इसी तरह की कार्यवाहियां नौगढ़ के जयमोहनी रेंज, सोनभद्र के म्योरपुर और चुर्क रेंज में भी की गयी है।

तत्काल दमन पर रोक लगाएं मुख्यमंत्री
उन्होंने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री जी आप अवगत होंगे कि देश की संसद ने आदिवासियों और वनाश्रित जातियों के लोगों की पुश्तैनी जमीन उनके नाम दर्ज करने के लिए वनाधिकार कानून बनाया है, जिसे इस क्षेत्र में विफल कर दिया गया। इसके खिलाफ आइपीएफ की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आपकी सरकार को इसे लागू करके दावाकर्ताओं को जमीन पर अधिकार देने का आदेश दिया था। पर बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके साढ़े चार साल के कार्यकाल में एक इंच जमीन का आवंटन नहीं किया गया और न ही दावों का निस्तारण ही किया गया। एक तरफ कानून व न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और दूसरी तरफ आपका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए वन विभाग की आदिवासियों और वनाश्रित जातियों के लोगों पर की जा रही ऐसी बर्बर कार्यवाही इस क्षेत्र की शांति को भंग कर देगी।
इससे पहले भी सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ के इस क्षेत्र में वन विभाग की इन बर्बर कार्यवाहियों के कारण सामाजिक तनाव पैदा हुआ था और अशांति पैदा हुई थी। जिसे लोकतांत्रिक आंदोलन के जरिए समाप्त किया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वह हस्तक्षेप करें और दमन व उजाड़ने की कार्यवाहियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएं, दमन करने वाले वन विभाग के अधिकारियों व कर्मियों को दण्डित करें और न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए आदिवासियों और वनाश्रित जातियों द्वारा वनाधिकार कानून के तहत पुश्तैनी जमीन पर किए दावों का निस्तारण कराकर उन्हें जमीन पर अधिकार प्रदान करें।