विकास कथा : रिफाइनरी का दोबारा शिलान्यास करेंगे मोदी, कांग्रेस करेगी विरोध प्रदर्शन
विकास कथा : रिफाइनरी का दोबारा शिलान्यास करेंगे मोदी, कांग्रेस करेगी विरोध प्रदर्शन
जोधपुर। आगामी 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पचपदरा में रिफाइनरी का दोबारा शिलान्यास करेंगे, इसके विरोध में जोधपुर देहात जिला काँग्रेस कमेटी के आह्वान पर ब्लॉक काँग्रेस सभी विधानसभा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करेगी, और रैली निकालकर संबंधित एसडीएम को ज्ञापन देगी।
जिला महासचिव एवं प्रवक्ता पुनीत जाँगु ने जानकारी देते हुए बताया कि जिलाध्यक्ष हीराराम मेघवाल ने सबी ब्लॉक अध्यक्षों एवं अन्य पदाधिकारियों को निर्देश जारी कर अनिवार्य रूप से इस कार्यक्रम को आयोजित करने का कहा है।
हीराराम मेघवाल की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सभी ब्लॉक अध्यक्षों से कहा गया है कि वे आमजन को ये संदेश दें कि जिस रिफाइनरी को आज शुरू हो जाना चाहिये था उसका दोबारा शिलान्यास किया जा रहा है। चार साल से उपर इस रिफाइनरी में देरी जानबूझकर की गई है। वसुंधरा राजे शुरू से ही जोधपुर जिले और जोधपुर संभाग के खिलाफ ही रही हैं। पहले वे एम्स के खिलाफ थीं और जनता के दबाव में उन्हें झुकना पड़ा और एम्स को जोधपुर में ही लगाना पड़ा और अब उनकी मंशा इस रिफाइनरी को रोकना ही था लेकिनजोधपुर और पूरे मारवाड़ की जनता के दबाव ने वसुंधरा राजे को एक बार फिर से झुकने को मजबूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष परनामी को भी प्रधानमंत्री मोदी की तरह झूठ बोलने की आदत हो गई है और लगता है कि वो बुरी तरह बौखला भी गये हैं तभी ऊलजलूल आरोप लगा रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत रिफाइनरी को रोकना चाहते हैं। जबकि जितने प्रयास उन्होंने इस रिफाइनरी को शुरू करवाने के लिए किये, धरना-प्रदर्शन किये और ये तक कहा था कि वसुंधरा राजे यदि रिफाइनरी शुरू कर देती हैं तो वे सारा श्रेय तक उन्हें दे देंगे।
उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे ने ये साबित कर दिया है कि वो कितनी विकास विरोधी हैं और साथ ही राजस्थान की जनता को भी धोखा दिया है। उन्होंने वसुंधरा राजे जी से जवाब मांगते हुए पूछा कि
1. आज भी उन्हीं शर्तों पर रिफाइनरी का एमओयू तैयार हुआ है, जगह भी वही है, यहां तक कि राज्य की हिस्सेदारी भी उतनी ही है तो फिर उन्हें क्या आवश्यकता थी कि इस रिफाइनरी को चार साल तक रोके रखा?
2. क्यों राज्य की जनता को राजस्व की हानि पंहुचाई गई?
3. रिफाइनरी के साथ लगने वाले उद्योगों से जो रोजगार मिलता उससे युवाओं को वंचित क्यों रखा गया?
ये ऐसे ज्वलंत प्रश्न हैं जिनका सीधा जुड़ाव जनता के हितों से है और उन्हें जनता के सामने अपने रूख को स्पष्ट करना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बौद्धिक क्षमता पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि
1. क्या भारत के प्रधानमंत्री को अपने पद की गरिमा का एहसास है या वे हर स्तर पर नीचे आने को ही अपनी गरिमा समझते हैं?
2. क्या प्रधानमंत्री को वसुंधरा राजे से यह स्पष्टीकरण नहीं मांगना चाहिए कि क्यों रिफाइनरी में इतनी देरी हुई और क्यों जनता के हितों को ताक पर रखा गया?
3. क्या ये प्रधानमंत्री के तथाकथित विज़न के "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" के सिद्धांत के विरूद्ध नहीं है?
4. क्या उन्हें इतना भी दुख नहीं है कि जिस तरह वे लगातार वे काँग्रेस की शुरू की हुई परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए श्रेय लेते जा रहे हैं, इस परियोजना का भी उद्घाटन उनके हाथों होता तो वे एक और श्रेय ले सकते थे?
5. या वे खुद अपने व्यापारिक मित्रों को लाभ पंहुचाने के लिए इस साजिश में भागीदार थे?
अब वैसे भी इसमें क्रूड तेल का इतना दोहन किया जा चुका है कि उससे राजस्थान को अरबों के राजस्व का नुकसान पंहुचने के साथ-साथ उनका दोहन भी कम हो पायेगा तो इस शिलान्यास का कोई औचित्य नहीं रहता है। वैसे यदि प्रधानमंत्री फिर भी रिफाइनरी का शिलान्यास करते हैं तो ये नकी की बौद्धिक क्षमता का परीक्षण भी हो जायेगा।


