विदेशी दबाव में राजीव गांधी दलहन एवं तिलहन मिशन निलम्बित कर देश को गहरी चोट पहुंचायी सरकार ने #मोदी_मतलब_मंहगाई
विदेशी दबाव में राजीव गांधी दलहन एवं तिलहन मिशन निलम्बित कर देश को गहरी चोट पहुंचायी सरकार ने #मोदी_मतलब_मंहगाई
केन्द्र की नीतियों ने दालों के दाम बढ़ाये- अतुल कुमार अनजान
#मोदी_मतलब_मंहगाई
नई दिल्ली। “दलहन और तिलहन के क्षेत्र में केन्द्र सरकार ने राजीव गांधी दलहन एवं तिलहन मिशन विदेशी दबाव के कारण निलम्बित कर देश को गहरी चोट पहुंचायी है और इसके चलते दोनों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है।“
यह कहना है अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान का।
अतुल कुमार अनजान ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के चलते दालों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पिछले एक महीने में जमाखोरों ने दाल के दाम बढ़ाकर साधारण लोगों से आठ हजार करोड़ रूपये लूट लिये। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद अरहर की दाल के दाम पहली बार 200 रूपये प्रति किलो की दर से बाजार में बिक रही है और केन्द्र सरकार ने जमाखोरों एवं वायदा कारोबारियों के स्टॉक सीमा को बहुत ही देर से तय करके उन्हें लूटने का अवसर दिया। जमाखोरों, वायदा कारोबारियों और कॉरपोरेट घरानों ने लोक सभा चुनाव में भाजपा-मोदी की बड़ी आर्थिक मदद की। इसलिये आज इन तत्वों द्वारा जनता लुट रही है।
भाकपा नेता ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने डेढ़ वर्ष बाद भी सरकार की कृषि नीति नहीं बनाई। किसानों की जारी आत्महत्या को केन्द्रीय कृषि मंत्री ने प्रेम प्रसंग और नपुंसकता के कारण की जा रही आत्महत्या जैसी ओछी बात कहकर किसानों का उपहास किया। देश के खाद्य मंत्री रामविलास पासवान पहले की भांति एक असहाय मंत्री के रूप में मंत्रालय की लूटपाट को जारी रखने में खामोश तमाशाई के रूप में भूमिका अदा कर रहे हैं।
केन्द्र सरकार दालों की दाम वृद्धि का जिम्मा राज्य सरकारों पर डालकर अपनी नाकामी को छुपाने का प्रयास कर रही है। केन्द्र सरकार को जून 2014 में पता था कि दाल का संकट होगा परन्तु जानबूझकर दाल का आयात न करके दामों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर वायदा कारोबारियों को लूट का अवसर दिया। शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन दाल का विश्वस्तरीय प्रति व्यक्ति खपत 103 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि 1956 में भारत में यह 70.3 ग्राम से उपलब्धता घटकर 2015 में मात्र 47.2 ग्राम रह गया। भारत में किसान 14 किस्म की दाल पैदा करते हैं। परन्तु केन्द्र सरकार निरन्तर उनका लाभकारी मूल्य तो दूर न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं देती।
भाकपा नेता ने आगे कहा कि देश में एक ओर केन्द्र सरकार मीडिया के माध्यम से प्रचार कर रही है कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों को कुपोषण से बचाने के लिये 80 ग्राम दाल प्रतिदिन खाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर दालों के दाम 200 रूपये प्रति किलो के कारण कई माह से आम लोगों की पहुंच के बाहर हो गयी है।
श्री अन्जान ने कहा दलहन और तिलहन के क्षेत्र में केन्द्र सरकार ने राजीव गांधी दलहन एवं तिलहन मिशन विदेशी दबाव के कारण निलम्बित कर देश को गहरी चोट पहुंचायी है और इसके चलते दोनों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। इसके द्वारा आयात कर्ताओं को आर्थिक लाभ के लिये केन्द्र सरकार ने यह दुष्कर्म किया है। केन्द्र सरकार को तत्काल दलहन, तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिये किसानों को विशेष आर्थिक सहयोग और तकनीकी मदद देने की घोषणा करनी चाहिए।


