‘साम्प्रदायिकता : बुनियादी जरूरतें और उभरती चुनोतियाँ’ पर मंथन
अयोध्या,19 सितम्बर। वरिष्ठ साहित्यकार रघुवंशमणि ने कहा है कि साम्प्रदायिकता के सवाल ने देश की तरक्की को रोक दिया है। धर्म को खतरनाक बना दिया गया है। साम्प्रदायिकता धर्म को प्रदूषित कर रही है। इसके कारण हम तमाम मामलो में पीछे हट रहे हैं। हमारी भावनात्मक एकता खत्म हो रही है। धर्म निरपेक्षता सभी धर्मों का सम्मान करती है जबकि साम्प्रदायिकता सांस्कृतिक विभेदता को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करती है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मतलब सिर्फ साम्प्रदायिक राष्ट्र होता है। साम्प्रदायिकता को हम विवेक द्वारा काट सकते हैं। इस राजनीति का हमें पर्दाफाश करना ही होगा।

श्री मणि गुरूवार को सरयू कुंज मन्दिर में अयोध्या की आवाज़ और अवध पीपुल्स फोरम द्वारा ‘साम्प्रदायिकता:बुनियादी जरूरतें और उभरती चुनोतियाँ’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। अयोध्या की आवाज़ और अवध पीपुल्स फोरम द्वारा अमन पखवाडा 2013 मनाया जा रहा है। 19 सितम्बर से शुरू होकर यह पखवाड़ा एक अभियान के तौर पर जनपद फैजाबाद और अम्बेडकर नगर में चलाया जायेगा। पखवाड़े का समापन 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती पर टांडा, अम्बेडकर नगर में किया जायेगा। इस दौरान विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

गोष्ठी को संबोधित करते हुये वाराणसी से आयीं डॉ. मुनीज़ा खान ने कहा कि हर धर्म में सनातन मूल्य एक ही है। शासक वर्ग अपने फायदे के लिये मन्दिर और मस्जिद को तोड़ता है,धर्म का नाम लेकर वह अपने कारगुजारियों को छिपाता है। फिरकापरस्तों की चुनौती को हमें स्वीकारना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी है, रोज़ बलात्कार हो रहे हैं। दंगो से सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित होती है।

व्यापारी नेता नंदकुमार गुप्ता ने कहा कि 90 के दशक में यह अयोध्या नगरी शांत और साफ सुथरी मानी जाती थी परन्तु अब दंगों की राजनीति शुरू हो चुकी है, यहाँ आग भड़केगी। उन्होंने कहा कि विहिप के कार्यक्रमों से सबसे अधिक प्रताड़ित व्यापारी वर्ग हुआ है। कथित 84 कोसी परिक्रमा से एक महीना की आय बाधित हुयी है। उनके इस प्रकार के कार्यकर्मों का हम सख्त बिरोध करेंगे।

रामजन्म भूमि के वरिष्ठ पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास ने कहा कि मानवता को कभी भूलना नही चाहिए। हमें दुनिया को शांति का संदेश देना चाहिये। अयोध्या का आपसी भाईचारा सबको सुसंदेश दे रहा है।

इकबाल मुस्तफा ने अपने उद्बोधन में कहा कि जो हक के लिये लड़ा जाये वही जेहाद है। अंग्रेजो ने धर्म की बुनियाद पर दंगा कराना प्रारम्भ किया। आज फिरकापरस्त ताकतें उसी का अनुसरण कर कर रही हैं। नफ़रत की बुनियाद पर न कोई हिन्दू है और न कोई मुस्लिम।

महंत गया दास ने विहिप पर हमला बोलते हुये कहा कि 84 कोसी परिक्रमा बरसात में रखने का कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं था, विहिप इसके बहाने दंगा करना कराना चाह रही थी। उन्होंने कहा कि मन्दिर-मस्जिद का मसला कोर्ट में है,इसके लिये आन्दोलन करना देशद्रोह है। इस्लाम सालिक ने कहा कि व्यक्तिगत विवाद को भी साम्प्रदायिक बना दिया जाता है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में युगलकिशोर शरण शास्त्री ने कहा कि दंगा प्रसार की जड़े साम्प्रदायिकता और वर्णव्यवस्था दोनों ही हैं। यह हमारी इंसानियत को पूरी तरह ख़तम कर देती है, अयोध्या की साझी विरासत की मजबूती से हम सभ्य समाज का निर्माण कर सकतें हैं।

कार्यक्रम का सञ्चालन अफाक ने किया। इस अवसर पर दानिश अंसारी, खालिद,छेदी लाल यादव, राजू गोंड, रामानंद मौर्या, इरम सिद्दिकी, फरहान, वासुदेव यादव, महादेव मौर्या,शाह आलम,विनोद कुमार आदि लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम में उतराखंड पीड़ितों को मदद करने की अपील की गयी।