वैशाली डालमिया के हक में तृणमूल का चुनाव प्रचार करेंगे सौरभ गांगुली!
वैशाली डालमिया के हक में तृणमूल का चुनाव प्रचार करेंगे सौरभ गांगुली!
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)। वैशाली डालमिया के हक में तृणमूल का चुनाव प्रचार करेंगे सौरभ गांगुली। जाहिर है कि निरपेक्ष माने जाने वाले दादा के इस कदम को सत्ता से नत्थी हो जाना मान रहे हैं बंगाल में लोग।
सचिन तेंदुलकर के राज्यसभा सांसद बनने के बाद दादा को हमेशा लुभावने राजनीतिक प्रस्ताव मिले हैं और उनने हर बार बापि बाड़ी जा स्टाइल से छक्का दागकर राजनीति को अपने मैदान से बाहर किया है। अबकी दफा दादा धर्मसंकट में हैं।
जाहिर है कि देशभर के क्रिकेटप्रेमियों को एक जोर का झटका आहिस्ते से लगने वाला है।
देश विदेश सार्वभौमिक दादा का रंग भी बदलने जा रहा है। राजनीति ने लंबे अरसे से उन्हें दलदल में धकेलने की कोशिश की है लेकिन वे इससे बचते रहे हैं। हालांकि पूर्ववर्ती वाम जमाने में उनके मुख्यमंत्री से लेकर तमाम लोगों से मधुर संबंध रहे हैं।
अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी उनके संबंध बेहतर हैं। खासकर जगमोहन डालमिया के अवसान के बाद दीदी के ही हस्तक्षेप से दादा बंगाल क्रिकेट के सर्वेसर्वा बन गये।
जगजाहिर है कि दिवंगत जगमोहन डालमियां से दादा के संबंध निजी संबंध की गहराइयों में थे। उन्हीं डालमियां की बेटी वैशाली डालमिया चुनाव मैदान में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर हावड़ा जिले के बाली से चुनाव लड़ रही हैं और निजी संबंध बेहतर निभाने वाले दादा के लिए वैशाली की मदद न करना असंभव है।
देखना तो यह है कि दादा क्या दूसरे चुनाव क्षेत्रों में भी तृणमूल कांग्रेस का प्रचारक बनकर अवतरित होते है या नहीं।
इस वक्त दीदी को सत्ता में वापसी के लिए कांटे के मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है और दादा बंगाल के हर घर में लोकप्रिय हैं। कोलकाता और उपनगरों में वैशाली डालमियां के बहाने ही दादा के दीदी के समर्थन में सड़क पर उतरने का राजनीतिक नतीजा कहने की जरुरत नहीं है दीदी के लिए वरदान होगा।
गौरतलब है कि खून में प्रशासनिक कुशलता होने और गाइड के रूप में पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली जैसे मित्र के बल पर पूर्व और दिवंगत खेल प्रशासक जगमोहन डालमिया की बेटी वैशाली डालमिया ममता बनर्जी की तरह जन सेवक बनना चाहती हैं।
तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पहली बार हावड़ा जिले के पड़ोसी बाली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहीं वैशाली ने कहा है, “मैं चौदह वर्ष की उम्र से ही सामाज सेवा कर रही हूं। राजनीति में आना मेरे लिए स्वाभाविक तरक्की है। इसके जरिए मुझको दूसरे स्तर की सामाजिक सेवा करने का अवसर मिलेगा।”
वैशाली ने जोर देकर कहा कि उनके पिता ने जीवन भर राजनेताओं को पसंद नहीं किया। लेकिन अगर वे आज जीवित होते तो न केवल खुश होते बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाते।


