सुभाष गौतम
लोक सभा चुनाव में अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में सीटों को लेकर राजनीतिक दलों में जातिगत रस्साकशी सबसे ज्यादा रहती है। बिहार में कुल 40 लोक सभा सीट हैं। 2014 के चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने जातीय समीकरण पर होम वर्क के बाद ही अपना प्रतिनिधि तय किया है। बिहार में कांग्रेस, आरजेडी और एनसीपी से गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। जिसमे आरजेडी 27 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कांग्रेस 12 सीटों पर, साथ ही एनसीपी मात्र एक सीट पर चुनाव लड़ेगी, जिसमे से एक भी वैश्य समाज का प्रतिनिधि नहीं है। ज्यादातर सवर्णों को ही टिकट दिया गया है। कांग्रेस, आरजेडी ने बिहार में सीटों पर प्रतिनिधि तय करते समय वैश्य समाज को नजरंदाज किया है। वैश्य समाज के हिस्से में एकभी सीट नहीं आई है यूँ कहे कि यूपीए गठबंधन ने किसी वैश्य समाज के प्रतिनिधि को टिकट नहीं दिया है, जिसका प्रतिकूल असर हो सकता है। बिहार में 22 प्रतिशत वैश्य समाज का वोट हैं। कुल मिलाकर 22 प्रतिशत मतदाता को लुभाने में कांग्रेस, आरजेडी नाकाम हो सकती है।
आरजेडी एनसीपी और कांग्रेस ने बिहार में जातीय समीकरण पर ध्यान न देकर अपने लिये कब्र खोदने का कम किया है। वैश्य समज के आरजेडी कार्यकर्त्ता ने बताया कि आगामी 21 मार्च तक कांगेस व आरजेडी कि बैठक दिल्ली में होने वाली है जिसमें 5 से 6 सीटों में फेर बदल हो सकता है। इस फेर बदल में कुछ नए लोगो को टिकट दिया जाना है। बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के टिकट बँटवारे को लेकर वैश्य समाज अपना समाज का कोई प्रतिनिधि न होने से खासा नराज दिख रहा है। कांग्रेस समर्थक वैश्य समाज के लोग बिहार में मुजफरपुर, सीतामढ़ी और बक्सर आदि में बैठक कर कांग्रेस और आरजेडी के खिलाफ मुहिम चलाने का निर्णय कर रही है। बिहार में 22 प्रतिशत वैश्य समाज का वोट हैं जिसको ध्यान में रख कर अन्य राजनीतिक पार्टियाँ लोक सभा सीटों का वितरण किया है। जाति समीकरण को ध्यान में रखते हुये एनडीए ने तीन वैश्य प्रतिनिधियों को टिकट दिया है वाही जनता दल यूनाइटेड और वाम गठबंधन ने भी दो प्रतिनिधियों के टिकट दिया हैं।
अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में जाति खास मायने रखती है। बिहार में दलितों और मुसलमानों कि स्थिति अभी भी एक दास कि तरह है इसे नकारा नहीं जा सकता है। इन्हीं दबे कुचले लोगों का प्रतिनिधित्व राम विलास पासवान और मीरा कुमार करतीं आ रहीं है। यह बात अलग है कि इन्होंने अपने समाज के लिये कुछ किया नहीं सिर्फ शोभा बढ़ाने का काम किया है। बिहार की राजनीति में दलितों में से आने वाले यह दोनों बड़े उदहारण हैं। बिहार में वैश्य समाज पिछड़ा वर्ग में आता है, आरजेडी और कांग्रेस अगर वैश्य समाज को अजर अंदाज कर के बिहार में लोक सभा चुनाव में अगर सीटों का बँटवारा किया है तो उसकी बड़ी भूल साबित हो सकती है। जो बिहार लोक सभा चुनाव में नासूर साबित हो सकती है।
सुभाष गौतम, लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।