शरद यादव ने गलत क्या कहा !!!
शरद यादव ने गलत क्या कहा !!!
वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार खुलकर शरद यादव के समर्थन में मैदान में ....शरद यादव ने गलत क्या कहा !!!
नई दिल्ली। जद(यू) अध्यक्ष शरद यादव को संघ परिवार के अंदर समर्थन मिल गया है। मोदी समर्थक समझे जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार खुलकर शरद यादव के समर्थन में मैदान में आ गए हैं। उन्होंने कहा है- आखिर स्मृति ईरानी भाजपा की नेता किस तरह हो गईं? क्या उनने किसी आंदोलन में भाग लिया? कभी संगठन के लिए जमीन पर काम किया? उनका भाजपा में योगदान क्या है? एक सीरियल की बहू की लोकप्रियता ने उनको यहां तक पहुंचा दिया।
श्री अवधेश कुमार ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है- “जनता दल युनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने मेरी दृष्टि में ऐसा कुछ भी गलत नहीं कहा जिससे उनको क्षमा मांगने या शर्मिन्दा होने की आवश्यकता हो। सच यह है कि हमारे देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जिसमें महिलाओं के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से लोग डरें। देश के कुछ महिला एनजीओ, सामाजिक सेवा के नाम पर काम करने वाले कुछ एनजीओ, कुछ महिला नेताओं, कुछ महिला पत्रकारों ......आदि ने स्थायी झंडा उठा लिया है।“
श्री कुमार लिखते हैं - “यह एक खतरनाक स्थिति है। शरद यादव ने केवल यह साबित करने का प्रयास किया कि हमारे देश में काले और गोरे रंग को लेकर पूर्वाग्रह है जो गलत है। निर्भया बलात्कार कांड पर डक्यूमेंटरी बनाने वाली महिला गोरी चमड़ी वाली थी इसलिए उसको सारी अनुमति मिल गई। हमारे यहां गोरे रंग को लेकर एक अजीब किस्म का भाव है।
उन्होंने यह भी कहा हमारे देवता राम और कृष्ण तो सांवले और काले थे, शिवशंकर भी काले थे, जिनको हम पूजते है, पर कालों को हेय दृष्टि से देखते हैं। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि दक्षिण की महिलाओं का रंग काला होता है, लेकिन उनका शरीर अच्छा होता है, उनमें कलाओं का ज्ञान हैं, वो नाचती भी हैं।“
अवधेश कुमार पूछते हैं इसमें क्या गलत है? इसमें कहां महिला का अपमान है? हमारी मानव संसाधान मंत्री स्मृति ईरानी भी झंडा लेकर खड़ी हो गईं और अंग्रेजी में कहने लगीं कि कृपया, महिलाओं के रंगों पर टिप्पणी न करें। तो शरद यादव ने कहा कि आप क्या हो यह मैं जानता हूं। वह लिखते हैं – “यह एक अक्खड़ आदमी का जवाब है। स्मृति ईरानी को आज तक ऐसा जवाब नहीं मिला था। लेकिन कोई तो आईना दिखाने वाला होना चाहिए। आखिर स्मृति ईरानी भाजपा की नेता किस तरह हो गईं? क्या उनने किसी आंदोलन में भाग लिया? कभी संगठन के लिए जमीन पर काम किया? उनका भाजपा में योगदान क्या है? एक सीरियल की बहू की लोकप्रियता ने उनको यहां तक पहुंचा दिया। सामान्यतः कह दिया जाता है कि निजी जिन्दगी पर टिप्पणी न किया जाए। सार्वजनिक जीवन में कोई निजी जिन्दगी नहीं होती। अगर आपकी निजी जिन्दगी में कुछ काले अध्याय हैं तो उस पर चर्चा होगी, आपको उसे झेलना पड़ेगा। यह वही कर सकता है जिसके अपने जीवन में काले अध्याय न हों, और जो किसी से डरता नहीं हो।“


