शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रभाव
शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रभाव
मनु शुक्ल
रिगल मानव सृजन वेलफेअर सोसाइटी ने अपने ४वर्षपूरे होने पर किया विचार गोष्ठी का आयोजन
शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रभाव विषय पर रिगल मानव सृजन वेलफेअर सोसाइटी ने अपने ४ वर्ष पूरे होने पर की विचार गोष्ठी
राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह कैसरबाग लखनऊ में अपने ४ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रिगल मानव सृजन वेलफेअर सोसाइटी ने किया
विचार गोष्ठी की अध्यक्षता श्री अरुणेश मिश्रा जी ने किया विचार गोष्ठी का संचालन संस्था की महासचिव मंजू शुक्ला ने किया मुख्या वक्ता थे लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. रमेश दीक्षित थे ! विचार गोष्ठी में कवि व अध्यापक श्री अरुणेश मिश्र,श्री एस .के .पाण्डेय, श्री प्रभात रंजन दीन ,श्री कौशल किशोर, धर्मेन्द्र शर्मा ने अपने विचार रखे गोष्ठी में विषय प्रवर्तन श्री प्रभात रंजन दीन जी ने किया ! गोष्ठी में अपनी बात कहते हुए श्री रमेश दीक्षित ने कहा की शिक्षा के बाजारीकरण ने शिक्षा की गुणवत्ता व सर्वग्राहिता समाप्त कर दी है और समाज में एवं खास वर्ग भी बना दिया है जिसकी जागीर हो गयी है शिक्षा ,समाज के एक बहुत बड़े हिस्से से जहाँ शिक्षा दूर हो गयी है वही शिक्षण एक व्यवसाय हो गया है एक शिक्षा माफिया शब्द भी आज आम बात हो गयी है! तथा संचालन संस्था की महासचिव मंजू शुक्ला ने किया। आमंत्रित वक्ताओं में एसके पांडे, प्रभात रंजन दीन, कौशल किशोर औरमिल रहे। गोष्ठी के बाद रिगल मानव सृजन वेलफेअर सोसाइटी द्वारा पूर्व में आयोजित तमाम प्रतियोगिताओ में विजयी बच्चो को पुरस्कार मुख्य अतिथि व गणमान्य व्यक्तियो द्वारा दिए गए !
रिगल की महासचिव मंजू शुक्ला जो स्वयं एक शिक्षिका है ने कहा की हमारी संस्था जनसहयोग से असहाय व गरीब बच्चो को व महिलाओ को को शिक्षा दे रही है तथा उनके चहुमुखी विकास के लिये हमेशा प्रयास करती है
इस आयोजन को सफल बनाने में रिगल कार्यकर्ता सैय्यद जुबैर,नवीन ,सुधा राजपूत,संध्या राजपूत,ए.के . जैदी आदि ने सहयोग दिया


