जन-विरोधी और शिक्षा-विरोधी ‘शिक्षा अधिकार कानून’ के लागू होने के तीन साल में सरकारी स्कूल व्यवस्था में तो रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ बल्कि इसके उलट आज अनेक प्रदेशों में सरकारी स्कूलों की तालाबंदी और नीलामी जोर-शोर से जारी है और पीपीपी के गोरखधंधे के चलते हजारों करोड़ सार्वजनिक धन निजी स्कूलों और कम्पनियों को तेजी से सौंपा जा रहा है। हमने शुरू से ही कहा था कि इस कानून की असल मंशा बच्चों को शिक्षा देना नहीं, बल्कि शिक्षा के कारोबार को बढ़ाना और सरकारी स्कूल व्यवस्था को चौपट करना है और आज पूरे देश में यही हो रहा है।

यह अफसोस की बात है कि शिक्षा अधिकार कानून के इस असल जन-विरोधी पहलू को नजरअंदाज कर कुछ स्वयंसेवी संस्थान (एनजीओ) इस कानून को ‘अच्छी तरह लागू कराने’ की वकालत करते हैं। हम इन संस्थाओं से पूछना चाहेंगे कि क्या इस कानून के ‘अच्छी तरह लागू होने’ से शिक्षा में मुनाफाखोरी और भेदभाव खत्म हो जाएगा? क्या देश के हर बच्चे को बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह मुफ्त और समतामूलक शिक्षा मिल जाएगी? क्या स्कूल शिक्षकों के साथ सरकार का अन्यायपूर्ण रवैया बदल जाएगा? क्या देश के सबसे गरीब दलितों, किसानो और मजदूरों के बच्चों को भी वैसी ही शिक्षा मिल जाएगी जो देश के सबसे सम्पन्न तबके के बच्चों को मिलती है? इन सवालों और ऐसे अनेक गंभीर सवालों का एकमात्र ईमानदार जवाब है– नही! लेकिन इस सीधी-सादी सच्चाई को ये एनजीओ कभी सामने नही रखते हैं। इसी से यह साफ हो जाता है कि ये एनजीओ शिक्षा में मुनाफाखोरी की व्यवस्था के पक्षधर हैं न कि जनता के अधिकार के। और तो और जो एनजीओ यह कहते हैं कि “कम से कम शिक्षा अधिकार कानून कुछ अधिकार तो देता है” उनसे हमारा सवाल है कि आखिर इस देश की गरीब, वंचित व दलित जनता के लिए ही ऐसे लचर ‘कुछ तो मिल गया है’ जैसे तर्क देकर ये कौन सी हमदर्दी दिखा रहे हैं? क्या ये एनजीओ इस देश के सम्पन्न तबके के लिए ऐसे तर्क देने का साहस करेंगे? कभी नहीं।

मध्य प्रदेश की जनता के लिए खतरे की बात है कि इस जन-विरोधी चरित्र के एनजीओ में अग्रणी ‘आरटीई फोरम’ प्रदेश में अपनी दलाली की दुकान खोलने की योजना बना रहा है। यह एनजीओ शिक्षा अधिकार विरोधी ‘शिक्षा अधिकार कानून’ का समर्थन तो करता ही है साथ ही बहुपरती शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा में मुनाफाखोरी, कारपोरेट पूंजी के बढ़ते दखल व नवउदारवादी सुधारों जैसे महत्वपूर्ण मसलों को सतही व भ्रामक तर्कों से तोड़-मरोड़कर और शिक्षा में बराबरी और न्याय की बजाय नवउदारवादी ‘समावेषण’ जैसे जुमले उछाल कर शिक्षा की लड़ाई में भटकाव लाने और उसे तोड़ने का काम देश के अनेक राज्यों में कर रहा है।

यह समय है कि हम सब, जो भेदभाव से मुक्त, समतामूलक और पूरी तरह मुफ्त शिक्षा के अधिकार व राज्य द्वारा वित्त-पोषित समान स्कूल व्यवस्था के निर्माण की लड़ाई लड़ रहे हैं, सावधान हो जाएं और ऐसे जन-विरोधी व गद्दार संस्थाओं को जनता के सामने बेनकाब कर दें। और साथ ही अपने उन साथियों को भी सावधान करें जो अब तक ‘शिक्षा अधिकार कानून, 2009’ के असल चरित्र और इसमें एनजीओ की भूमिका को लेकर जनपक्षधर समझ विकसित नही कर पाए हैं। यह समय है कि हम शिक्षा में गैरबराबरी के खिलाफ सही समझ से लैस होकर जनता को सही लड़ाई के लिए जागृत व संगठित करें न कि भ्रामक और समझौतापरस्त तर्कों से जनता को गुमराह करें।

‘आरटीई फोरम’ व अन्य एनजीओ प्रदेश में अपनी मंशाओं को अंजाम देने के लिए 15 नवंबर को भोपाल के एम.पी. नगर स्थित ‘होटल आर्क मेनर’ में बैठक आयोजित कर रहे हैं। यह बैठक सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेगी। शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल और इसके सहयोगी संगठन उसी समय होटल के सामने शिक्षा में दलाल बने इस एनजीओ और इसके सहयोगियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। आप सबसे अपील है कि शिक्षा के अधिकार की लड़ाई को मजबूत करने के लिए इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों और शिक्षा में गैर-बराबरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ एक ईमानदार व मजबूत आवाज उठाएं!
शिक्षा में एनजीओ की दलाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
समय व तारीखः 15 नवंबर 2013, सुबह 10:00 बजे से 02:00 बजे तक
स्थानः होटल आर्क मेनर, एम.पी. नगर, जोन – I, (डीबी मॉल के सामने की सड़क पर)
याद रखें जब तक देश में गैरबराबरी पर आधारित बहुपरती शिक्षा व्यवस्था कायम रहेगी, जब तक शिक्षा में मुनाफाखोरी जारी रहेगी और जबतक शिक्षा में निजी व कारपोरेट पूंजी का दखल रहेगा तब तक देश के हर बच्चे को समतामूलक और पूरी तरह मुफ्त शिक्षा नही मिल सकती।

जिंदाबाद!

लोकेश मालती प्रकाश

शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल

(09407549240)