शोभन सरकार के सपने के खिलाफ अदालत पहुँचे जानी
शोभन सरकार के सपने के खिलाफ अदालत पहुँचे जानी
इलाहबाद 16 दिसंबर। लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी नेत्री, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मूर्ति को तोड़कर चर्चा में आये उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष एवम् सपा नेता अमित जानी ने आज शोभन सरकार के कथित सपने के आधार पर उन्नाव के डौंडियां खेड़ा में हुये खुदाई को अदालत में चुनौती दे दी।
माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद में दायर जनहित याचिका में अमित जानी ने आरोप लगाया है कि संत सोभन सरकार को सपना आता है कि उन्नाव में डौंडियां खेड़ा में 1000 टन सोना दबा है, जीएसआई उसका सर्वे करके बाबा के सपने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट देता है कि हाँ सर्वेक्षण में पाया गया है कि जमीन के नीचे भारी मात्रा में धातु है, लेकिन लगातार खुदाई करने के बाद जब कुछ नहीं मिलता तो जी एस आई और बाबा अलग हट जाते है जबकि खुदाई के नाम पर जनता का खून पसीने का पैसा बर्बाद हो जाता है। याचिकाकर्ता अमित जानी ने आरोप लगाया है कि यदि ज़मीन के नीचे सोना या सोने जैसी कोई भी धातु थी तो वो खुदाई में बरामद क्यों नहीं हुयी और यदि कुछ नहीं था तो जीएसआई की रिपोर्ट के मायने ही क्या रह जाते हैं।
याचिकाकर्ता अमित जानी ने कहा कि 4 राज्यों में चुनाव होना था जनता महँगाई, भूख, गरीबी जैसे मुद्दों पर केन्द्र से त्रस्त थी। कहीं जनता को मुख्य मुद्दों से हटाकर सोने के सपनों के जोड़ने का ये सरकारी षड्यंत्र तो नहीं था और अगर ऐसा था तो खुदाई में होने वाले सरकारी खर्च का हिसाब कौन देगा ? अमित जानी ने कहा कि आज शोभन सरकार फिर से फतेहपुर में 2500 टन सोना दबा होने का दावा लेकर माननीय उच्च न्यायलय की शरण में आये हैं अगर इनके इस दावे को गंभीरता से ले भी लिया जाये तब भी ये यक्ष प्रश्न खड़ा रह जाता है आखिर उनका पहला दावा क्यूँ सच साबित नहीं हुआ ? अगर इसमें खुदाई करने वाली जीएसआई और एएसआई की खामियाँ है तो भी इस खुदाई के खर्च का बोझ आम आदमी की जेब पे क्यूँ पड़े??
अमित जानी ने बताया कि उन्होंने जनहित याचिका में माँग की है कि न्यायपालिका जीएसआई, एएसआई और शोभन सरकार को नोटिस जारी करके उनसे इस बात का जवाब माँगे कि आखिर बाबा के सपने और जीएसआई की रिपोर्ट और एएसआई की खुदाई का आधार क्या था? अमित जानी ने कहा कि एक विश्व प्रसिद्द बाबा (रामदेव ) लगातार कहता है कि स्विस में काला धन है वापस लाओ तो उसको आयकर और परवर्तन निदेशालय से फँसाने का प्रयास होता है, सीबीआई भेजी जाती है और एक क्षेत्रीय बाबा ( शोभन ) कहता है कि खजाना है तो सरकार सारा तामझाम लेकर चली आती है यदि सरकार को धन ही चाहिए तो रामदेव की प्रमाणिक रिपोर्ट को छोड़कर वो किसी अन्धविश्वासी के सपने का पीछा क्यूँ कर रही है ?


