संघ को हिन्दू धर्म की कोई समझ नहीं, भ्रमित हैं मोहन भागवत
संघ को हिन्दू धर्म की कोई समझ नहीं, भ्रमित हैं मोहन भागवत
मोहन भागवत भ्रमित हैं
या भ्रम फैला रहे हैं ? उनके ताजा बयान ने फिर साबित किया है कि संघ के पास न तो स्पष्ट राष्ट्रबोध है न ही उसके पास धर्मबोध है। संघ-प्रमुख ने कहा है कि हर भारतीय हिन्दू है। संघ भारतीय नागरिकों के बीच धार्मिक आधार पर वैमनस्य का कोई अवसर नहीं छोड़ता है। उसके प्रधानमंत्री से लेकर साधारण स्वयंसेवक तक, प्रचारक, सायबर सैनिक, मीडिया लठैत, प्रवक्ता आदि अनवरत घृणा और असहिष्णुता के दलदल में भारतीय समाज को धकेलने के नीच कर्म में लगे रहते हैं। उनकी भाषा का नीच स्तर संबिद पात्रा जैसे लोग पैदा करता है जो विपक्ष के स्वधर्मी नेताओं और धर्मनिरपेक्ष विचारकों को मौलाना मुल्ला मियां जैसे शब्दों से संबोधित कर छिछले स्तर के लम्पट हिंदुत्व को आकर्षित करते हैं। यही लम्पट हिंदुत्व किसी शम्भू रैगर को उत्तेजित करता है। खुद नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में ऐसे बिम्ब और प्रतीक प्रयोग करते हैं जो भारतीयों को धर्म के आधार पर विभाजित करें, यथा शमशान-कब्रिस्तान, रमजान में बिजली तो दीवाली पर क्यों नहीं जैसे प्रश्न, अहमद पटेल के सीएम होने की कल्पना से डराना आदि ताजे उदाहरण हैं। मुलायम सिंह के लिए मुल्ला और मौलाना शब्दों का प्रयोग तो दशकों किया गया। खैर, कल भागवत के बयान ने फिर बताया कि 'मुहं में राम बगल में छुरी' कहाबत यूँ ही नहीं बनी।
मोहन भागवत का कल का बयान और सभी संघियों का अब तक का आचरण सिद्ध करता है कि संघ को हिन्दूधर्म की कोई समझ नहीं है। संघ का राष्ट्रबोध भी स्पष्ट नहीं है। संघ का हिंदुत्व हिंदुओं के निकृष्टम और लम्पट लोगों को उकसाने के सिवाय कुछ नहीं है। संघ सभी हिंदुओं को उसी नीच स्तर पर लेजाना चाहता है। यह जड़ता अंधविश्वासों अविवेक घृणा हिंसा और अज्ञान के अंधेरों में हिंदुओं को धकेल रहा है। आप संघी हिंदुत्व के बढ़ने पर भारत की दुर्दशा की ही कल्पना कर सकते हैं।


