लखनऊ, 12 मई। रिहाई मंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर के द्वारा दाखिल किये गए शपथ-पत्र प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ अपने पद का दुरुपयोग करके बचना चाहते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शपथ-पत्र में कहा गया है कि योगी आदित्यनाथ पर 2007 में गोरखपुर में साम्प्रदायिकता फैलाने पर मुक़दमा दर्ज सम्बन्ध में सीबीसीआईडी द्वारा मांगी गयी अनुमति को सरकार ने 3 मई को देने से इनकार कर देने पर

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सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता असद हयात ने कहा कि जिस तरह 2007 में गोरखपुर में साम्प्रदायिकता फैलाने पर मुक़दमा दर्ज करने के सन्दर्भ में प्रमुख सचिव राहुल भटनागर ने जबाब दिया है, इससे साबित है कि योगी आदित्यनाथ द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किया गया है और उन्हीं के इशारे पर यह नामंजूरी की गयी है. क्या इसी तरह कानून का शासन योगी सरकार स्थापित करना चाहती है.

उन्होंने सवाल किया कि अगर तीन मई को यह नामंजूरी हो गयी थी तो फिर 4 मई को सरकार के वकील ने हाई कोर्ट को क्यों नहीं बताया. इसपर हाई कोर्ट ने अपनी नाखुशी का इज़हार करते हुए कहा था कि अगर यह बता दिया गया होता तब क्यों हम मुख्य सचिव को तलब करते.

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श्री हयात ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की विचारधारा कानून के शासन में नही रही है. अतीत में उनके भाषणों और कार्यकलापों से साफ़ होता है कि उन्होंने अपने राजनीतिक उदेश्य के लिये साम्प्रदायिकता का सहारा लिया है और वे हिंसा करने के लिए भी लोगों को भड़काते रहे हैं और अब सत्ता में आने के बाद सरकारी तंत्र का दुरूपयोग अपने पक्ष में कर रहे हैं.