सन्दीप पाण्डेय की बर्खास्तगी शिक्षा परिसरों से उठने वाली विरोध की आवाज़ को ख़ामोश करने की संघी योजना
सन्दीप पाण्डेय की बर्खास्तगी शिक्षा परिसरों से उठने वाली विरोध की आवाज़ को ख़ामोश करने की संघी योजना
प्रो. सन्दीप पाण्डेय की आईआईटी-बीएचयू से बर्खास्तगी शिक्षा परिसरों से उठने वाली विरोध की हर आवाज़ को ख़ामोश करने की संघी योजना का हिस्सा है!
यह एक व्यक्ति की नौकरी की लड़ाई नहीं बल्कि जनवादी अधिकारों और शिक्षा संस्थानों को बचाने की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।
वाराणसी, दिल्ली, इलाहाबाद, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई - कैम्पसों के भगवाकरण और छात्रों-शिक्षकों के दमन का सिलसिला जारी है
सन्दीप पाण्डेय की बर्खास्तगी के विरोध में लखनऊ में धरना
लखनऊ। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज़िटिंग प्रोफेसर सन्दीप पाण्डेय पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर बर्खास्त किये जाने और देशभर में शिक्षा संस्थानों में बढ़ते भगवा हमलों के विरोध में विभिन्न जनसंगठनों और बुद्धिजीवियों ने आज यहाँ जीपीओ स्थित गाँधी प्रतिमा पर धरना दिया। सोशलिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष सन्दीप पाण्डेय पिछले ढाई वर्षों से आईआईटी-बीएचयू की कुछ शाखाओं एवं डेवलपमेंट स्टडीज़ कोर्स में पढ़ा रहे थे।
धरना स्थल पर उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने कहा कि सन्दीप पाण्डेय जैसे व्यक्ति को राष्ट्रद्रोही बताना एक शर्मनाक मज़ाक है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में देश में घोर अवैज्ञानिक और पिछड़े मूल्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब प्रधानमंत्री खुद वैज्ञानिकों की सभा में आदि काल में गणेश की प्लास्टिक सर्जरी होने जैसी हास्यास्पद बातें करेंगे तो शिक्षा-संस्कृति का क्या हाल होगा?
अरविन्द स्मृति न्यास की अध्यक्ष मीनाक्षी ने कहा कि केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही तमाम अकादमिक संस्थानों को संघ परिवार के नियंत्रण में लाने के प्रयास जारी हैं। योग्य लोगों को हटाकर संघ से जुड़े लोगों को संस्थानों में बैठाया जा रहा है और ऐसे लोगों को चुन-चुनकर हटाया जा रहा है जो संघ के एजेण्डा के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं। सन्दीप पाण्डेय अपना शिक्षकीय दायित्व पूरी ज़िम्मेदारी और योग्यता से निभा रहे थे। किसी शिक्षक की वैचारिक और सामाजिक प्रतिबद्धताओं के कारण उसे कैसे हटाया जा सकता है। अगर वे राष्ट्रदोही गतिविधियों में शामिल थे तो विश्वविद्यालय प्रशासन उनके विरुद्ध राष्ट्रदोह का मुकदमा दर्ज कराने की हिम्मत दिखाये।
जागरूक नागरिक मंच के सत्यम ने कहा कि सन्दीप पाण्डेय का ‘’अपराध’’ यही है कि वे आजीविका के लिए जूझ रहे विश्वविद्यालय के 40 ठेका कर्मियों के साथ धरने पर बैठे, ‘’नक्सली’’ बताकर जेल में डाले गये एक नब्बे प्रतिशत विकलांग शिक्षक के जीवन को बचाने के लिए नागरिक सुरक्षा कमेटी में शामिल रहे हैं, सामाजिक एवं लैंगिक न्याय की बात करते हैं और दैत्याकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लूट से प्राकृतिक संसाध्नों को बचाने के लिए प्रतिरोध की मुहिम में शामिल हैं। संघ परिवार की परिभाषा में ये सब ‘’राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ’’ हैं। यह एक व्यक्ति की नौकरी की लड़ाई नहीं बल्कि जनवादी अधिकारों और शिक्षा संस्थानों को बचाने की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।
नौजवान भारत सभा की गीतिका ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में रामजन्मभूमि पर सेमिनार करने के लिए परिसर को फौजी छावनी बना देना, पुणे फिल्म एवं टीवी संस्थान के छात्रों की बर्बर पिटाई, हैदराबाद विश्वविद्यालय से दलित छात्रों का निष्कासन, ऑक्युपाई यूजीसी आन्दोलन में छात्रों का बार-बार दमन — ये सब एक ही सिलसिले की कड़ियाँ हैं। कभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में योगी आदित्यनाथ को छात्रसंघ के उद्घाटन के लिए बुलाया जाता है तो कभी जेएनयू में रामदेव जैसे पाखण्डी व्यापारी को वेदान्त पर सेमिनार में बुलाया जाता है। विरोध करने वालों पर संघी गुंडों और पुलिस से हमला कराया जाता है।
वक्ताओं ने बीएचयू प्रशासन के इस कदम की कठोर भर्त्सना करते हुए सन्दीप पाण्डेय की विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में बहाली एवं कैम्पस में विरोधी आवाजों के दमन को रोकने की माँग की। साथ ही इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों द्वारा किये जा रहे विरोध को पूरा समर्थन देने और इस मुहिम को व्यापक बनाने के प्रयासों में शामिल होने की घोषणा की। सभा में रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, डा. राजीव कौशल, संजय श्रीवास्तव, स्त्री मुक्ति लीग की शाकम्भरी, शिवा, शिप्रा, रूपा शुक्ला, आशीष सिंह, कल्पना दीपा, जौनपुर से आये आदिल व सलाम, सत्येन्द्र सार्थक, सृजन श्रीवास्तव, आदित्य सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र-युवा कार्यकर्ता उपस्थित थे।


