जी हां, सपा का खलनायक अमर सिंह कम राम गोपाल ज़्यादा हैं
मसीहुद्दीन संजरी

अखिलेश यादव के फैसलों इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया कि विरासत जन्म के आधार पर मिल तो सकती है लेकिन कायम भी रह जाय यह ज़रूरी नहीं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल और उनके समर्थक माने जाने वाले मंत्रियों की छुट्टी की तो अखिलेश के इस निर्णय के पीछे माने जाने वाले दिमाग़ राम गोपाल को शिवपाल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया।

राम गोपाल यादव के भाजपा नेताओं के साथ रिश्ते बहुत पुराने हैं और सीबीआई के डंडे ने उस रिश्ते में राजनीति के साथ डर भी जोड़ दिया।

अब मुलायम कितने और किसके लिए मुलायम या कठोर साबित होते हैं यह देखने की बात है? फिलहाल समाजवादी पार्टी का बेड़ ग़र्क होता साफ दिखाई दे रहा है।

सपा विभाजन की तरफ बढ़ रही है। चर्चा में अखिलेश, शिवपाल और मुलायम हैं लेकिन एक बड़ा खिलाड़ी जो इस विभाजन और भाजपा के अखिलेश प्रेम के लिए ज़िम्मेदार है उसका नाम कम आ रहा है। जी हां, वह अमर सिंह कम राम गोपाल ज़्यादा है।

चाचा शिवपाल यादव और उनके समर्थक माने जाने वाले 6 मंत्रियों को मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर अखिलेश यादव ने सपा में वर्चस्व की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तोड़ने का प्रयास तो बसपा को भी किया गया था लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। प्रदेश की राजनीति में सितम्बर, अक्तूबर नेता और पार्टी तोड़क महीना है और नवम्बर प्रत्याशी घोषित करने का। उसके बाद जनता को धर्म, समुदाय और जातियों में बांटने की बारी होगी। विकास के लिए इन महत्वपूर्ण घटनाओं की अपनी अहमियत होती है।

Ram Gopal Yadav is more responsible for Division of the SP and the BJP's love for Akhilesh