सपा में घमासान – भाजपा की चुप्पी कई तरह की शंका पैदा करती है

मसीहुद्दीन संजरी

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार में उठा–पटक के बीच एक बात समझ से परे है।

समाजवादी पार्टी दो खेमों में विभाजित हो चुकी है। आमतौर से ऐसे हालात में विपक्षी दल सरकार से बहुमत साबित करने की मांग करते हैं या राष्ट्रपति शासन की बात करते हैं, लेकिन इस मामले में सन्नाटा है।

कांग्रेस या बसपा चुप है तो बात समझ में आती है, क्योंकि दोनों ही दल भाजपा से अपना मुकाबला मान कर चल रहे हैं और कभी नहीं चाहेंगे कि केंद्र में भाजपा सरकार हो और चुनाव राष्ट्रपति शासन में लड़ा जाए। मगर भाजपा के लिए तो यह आदर्श स्थिति होती, इसलिए उसकी चुप्पी कई तरह की शंका पैदा करती है। कहीं सब कुछ उसके मंसूबे के हिसाब से तो नहीं चल रहा है? अगर ऐसा है तो कौन है मोहरा?