सपा सरकार का इंसाफ का दोहरा मियार और समाज का दुश्मन संगीत सोम
सपा सरकार का इंसाफ का दोहरा मियार और समाज का दुश्मन संगीत सोम
शबरोज मोहम्मदी
मुजफ्फरनगर को आग के हवाले करने वाला संगीत सोम आज कैराना को आग में झोंक देने का ख्वाब इस लिये देख रहा क्योंकि उसे हुकूमतों की शह प्राप्त है (सपा, भाजपा)।
रिहाई मंच आज की तरह उस वक्त भी ऐसी हैवानी कृत्य को रोकने के लिये अपनी पूरी ताकत लगाई थी कि जिस से न लोगों की जानें जाये, न आबरू लुटे न दिलों में दरारें पड़ें न घर खण्डहर में तब्दील होने पायें, लेकिन इन इन्सान दुश्मन ताकतों के सामने रिहाई मंच की कोशिशें नाकाम रहीं।
याद रहे कि जब मुजफ्फरनगर को आग के हवाले करने के लिये संगीत सोम, सुरेश राणा सोशल मीडिया के जरिए घिनौनी चालें चल रहे थे, तब रिहाई मंच ने राजीव यादव की कयादत में संगीत सोम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी लेकिन अमीनाबाद लखनऊ की पुलिस ने एफआईआर दर्ज न करके संगीत सोम जैसे समाज दुश्मन अनासिर को खुला छोड़ दिया, जिस का असर आज एक बार फिर से फश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग देख रहे हैं। जबकि वहीं अमीनाबाद की पुलिस हाशिमपुरा के पीड़ितों के लिये इंसाफ मांग रहे रिहाई मंच के 35 लोगों पर दंगा भड़काने के आरोप में केस दर्ज किया है, लेकिन सोम उसको आज भी दंगाई नजर नहीं आ रहा है, जिस के कारण मुजफ्फरनगर का इतिहास, भूगोल दोनों बदल गया।
मुजफ्फरनगर दंगे की रिपोर्ट में यदि विष्णु सहाय ने सोशल मीडिया पर संगीत सोम के घिनौने कृत्य का वर्णन किया होता तो शायद संगीत सोम आज शान्ति में खलल डालने के लिये समाज में खुला न घूम रहा होता।
दोस्तों मौकापरस्त हुकूमतों के इन्साफ के दोहरे मियार को संजीदगी से समझना होगा।


