सपा सरकार की जेल में खालिद मुजाहिद की हत्या और संगीत सोम को ऐश !
सपा सरकार की जेल में खालिद मुजाहिद की हत्या और संगीत सोम को ऐश !
दंगों के आरोपी भाजपा विधायक सुरेश राणा कैसे
जेल से फेसबुक अपडेट कर रहे थे
बताएं राजेन्द्र चौधरी- रिहाई मंच
दोषी जेलरों को बर्खास्त कर जांच के दायरे में लाया जाए- रिहाई मंच
सुरेश राणा द्वारा जेल में रहते हुए मोबाइल से फेसबुक अपडेट करने के मामले में
रिहाई मंच ने एक तहरीर अमीनाबाद कोतवाली, लखनऊ को भेजी
लखनऊ/ 20 नवंबर 2013। रिहाई मंच ने कहा है कि समाजवादी पार्टी की सरकार में आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को तो प्रताड़ित किया जाता है और सांप्रदायिक हिंसा करने वाले ऐश-औ-आराम से रहते हैं।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि जिस तरीके से भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा ने जेल में रहते हुए अपने फेसबुक एकाउंट अपडेट किया उसने इन जेलों के जेलरों को कटघरे में खड़ा कर दिया है, इस पर प्रदेश के कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी स्पष्टीकरण दें। उन्होंने कहा इस पूरी घटना से सपा सरकार का दोहरा और सांप्रदायिक रवैया उजागर हो जाता है। जहां एक तरफ आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए निर्दोष नौजवानों को जेल मैनुवल को अनदेखा करते हुए उन्हें अमानवीय यातनाएं दी जा रही हैं, जान लेवा हमले हो रहे हैं, यहां तक कि खालिद मुजाहिद जैसे निर्दोष की हत्या तक एसटीएफ व आईबी द्वारा करा दी जाती है और राजेन्द्र चौधरी से शिकायतों के बावजूद कोई कार्यवाई नहीं होती है तो वहीं दंगा भड़काने के आरोपी भाजपा नेताओं को रासुका में निरुद्ध होने के बावजूद जेलों से सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए फेसबुक, मोबाइल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं, जिससे समझा जा सकता हैं कि सपा किस तरह दंगाईयों के साथ खड़ी है।
मुजफ्फरनगर व आस-पास के क्षेत्रों में भड़काऊ भाषण व सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के मामले में जेल भेजे गए सुरेश राणा जिन पर रासुका भी लगी थी द्वारा जेल में रहते हुए मोबाइल से फेसबुक अपडेट करने के मामले पर रिहाई मंच ने आज 20 नवंबर को एक तहरीर अमीनाबाद कोतवाली, लखनऊ को भेजी।
अमीनाबाद कोतवाली, लखनऊ में तहरीर भेजने वाले रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने बताया कि सुरेश राणा ने जेल के अंदर से अपने फेसबुक एकाउंट का संचालन किया है। दिनांक 5 अक्टूबर को समय 6 बजकर 17 मिनट सुबह संदेश अपलोड किया गया कि कल पेशी के टाइम मुजफ्फरनगर कोर्ट में उमड़े अपार जनसमूह के लिए सबका आभार मैं वादा करता हूं कि चाहे एक नहीं सौ बार रासुका लगे लेकिन मैं अपनी बहनों के सम्मान की लड़ाई ऐसी ही आप सभी के सहयोग से लड़ता रहूंगा। इससे स्पष्ट है कि जेल व पुलिस अभिरक्षा में रहते हुए मोबाइल फोन के जरिए सुरेश राणा फेसबुक पर अपने संदेश लगातार अपलोड कर रहे थे। 21 सितंबर 2013 को मोबाइल से फेसबुक पर शाम 8 बजकर 4 मिनट पर संदेश दिया गया था कि श्री सुरेश राणा विधायक को मुजफ्फरनगर जेल से बांदा जेल भेज दिया गया है और प्रशासन एकतरफा कार्यवाई कर रहा है। दिनांक 26 सितंबर को मोबाइल से फेसबुक पर अपडेट किया गया है कि सुरेश राणा के विरुद्ध रासुका लगाई गई है। दिनांक 27 सितंबर को भी न्यूज पेपर की कटिंग अपलोड की गई है, 29 सितंबर की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर संदेश दिया गया कि पुलिस बांदा जेल से श्री सुरेश राना को फोर्स लेकर चल चुकी है, 30 सितंबर को सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर संदेश दिया गया कि खेड़ा की पंचायत से घबराकर पुलिस विधायक जी को रास्ते से वापस बांदा ले गई है, आज वह कैराना नहीं आएंगे जब आने का कार्यक्रम होगा सूचित कर दिया जाएगा। 3 अक्टूबर को पुनः मोबाइल से संदेश दिया गया कि कल सुरेश राना को मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेश किया गया।
सामाजिक संगठन अवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने कहा कि जिस तरह से सुरेश राणा और संगीत सिंह सोम जैसे लोगों ने मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक सौहार्द्र को नेस्तानाबूद करने वाले लोगों को सपा सरकार की जेलों में फेसबुक द्वारा प्रदेश के माहौल को सांप्रदायिक रंग देने की खुली छूट दे रखी थी उसने साफ कर दिया है कि अखिलेश सरकार मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक हिंसा के शिकार लोगों के साथ नहीं है बल्कि सोम और राणा जैसे लोगों के साथ है जिनके खिलाफ लचर पैरवी कर उसने उन पर से रासुका हटवायी। उन्होंने कहा कि रिहाई मंच द्वारा राणा और सोम के खिलाफ पुलिस को दी गयी तहरीरों के सवालों को सुप्रीम कोर्ट में मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर चल रहे मुकदमे में उठाया जायेगा।
रिहाई मंच के नेता हरेराम मिश्र ने कहा कि लाखों लोग जो विस्थापित हैं जिनके अपनों की हत्या की गयी, माताओं बहनों को अपमानित किया गया, आज भी फुगाना गांव में हुए सामूहिक बलात्कारों के अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं और ऐसे में उरई और मुजफ्फरनगर की जेलों से जिस तरीके से फेसबुक अपडेट करने का मामला प्रकाश में आया है वह साफ दर्शाता है कि दंगे के आरोप में जेलों में बंद इन नेताओं द्वारा मुजफ्फरनगर व आस पास के क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान वे न केवल फेसबुक ऑपरेट कर रहे थे बल्कि वे इन जेलों से सांप्रदायिक हिंसा का संचालन कर रहे थे। प्रदेश सरकार तत्काल मुजफ्फरनगर तथा उरई के जेलरों को बर्खास्त करते हुए वहां के जिला अधिकारियों से स्पस्टीकरण मांगे कि यह सब किसकी शह पर हो रहा था।
रिहाई मंच द्वारा दी गई तहरीर
रजिस्टर्ड
सेवा में, दिनांक- 20 नवंबर 2013
श्रीमान प्रभारी निरीक्षक
कोतवाली अमीनाबाद, लखनऊ
विषय- सांप्रदायिक व्यक्तियों/संगठनों द्वारा फेसबुक एकाउंट का संचालन करके साइबर क्राइम और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले अपराध कारित करना।
महोदय,
निवेदन करना है कि प्रार्थी अक्सर फेसबुक पर जाता रहता है। दिनांक 16 नवंबर 2013 को लखनऊ में जब प्रार्थी फेसबुक पर था तो वह सर्च करते हुए सुरेश राना (वर्तमान विधायक भारतीय जनता पार्टी विधानसभा क्षेत्र थानाभवन जनपद मुजफ्फरनगर) के भी फेसबुक एकाउंट प्रोफाइल https://www.facebook.com/suresh.rana.779205?fref=ts पर गया। श्री सुरेश राणा भड़काऊ भाषण देने और दंगा कराने के मामले में जेल गए थे। राज्य सरकार द्वारा इन पर रासुका भी लगाया गया था। जहां पाया कि सुरेश राणा ने जेल के अंदर से अपने फेसबुक एकाउंट का संचालन किया है। 21 सितंबर 2013 को मोबाइल से फेसबुक पर शाम 8 बजकर 4 मिनट पर संदेश दिया गया था कि श्री सुरेश राणा विधायक को मुजफ्फरनगर जेल से बांदा जेल भेज दिया गया है और प्रशासन एकतरफा कार्यवाई कर रहा है। दिनांक 22 सितंबर 2013 को 11 बजकर 34 मिनट सुबह पर मोबाइल से दूसरा संदेश फेसबुक पर डाला गया कि विधानसभा में आजम खान को दोषी बताने व इंसाफ मांगने पर गिरफ्तारी की गई है और सरकार अत्याचार कर रही है तथा वर्ग विशेष को खुश करने के लिए परेशान कर रही है अगर जल्दी रिहा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। दिनांक 22 सितंबर को बांदा जेल में लाठी चार्ज करने का संदेश मोबाइल से ही अपडेट किया गया। दिनांक 23 सितंबर और 24 सितंबर को भी संदेश अपलोड किए गए हैं। दिनांक 26 सितंबर को मोबाइल से फेसबुक पर अपडेट किया गया है कि सुरेश राणा के विरुद्ध रासुका लगाई गई है। दिनांक 27 सितंबर को भी न्यूज पेपर की कटिंग अपलोड की गई है, 29 सितंबर की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर संदेश दिया गया कि पुलिस बादा जेल से श्री सुरेश राना को फोर्स लेकर चल चुकी है, 30 सितंबर को सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर संदेश दिया गया कि खेड़ा की पंचायत से घबराकर पुलिस विधायक जी को रास्ते से वापस बांदा ले गई है, आज वह कैराना नहीं आएंगे जब आने का कार्यक्रम होगा सूचित कर दिया जाएगा। दिनांक 1 अक्टूबर को भी सुरेश राणा के फेसबुक पर हिन्दुस्तान समाचार पत्र की कटिंग अपलोड है। 3 अक्टूबर को पुनः मोबाइल से संदेश दिया गया कि कल सुरेश राना को मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेश किया गया। दिनांक 4 अक्टूबर को सुरेश राणा का समाचार पत्र में दिया गया बयान कटिंग फेसबुक पर अपलोड किया गया जिसका शीर्षक है ‘बहनों के सम्मान को सौ रासुका मंजूर’। दिनांक 5 अक्टूबर को समय 6 बजकर 17 मिनट सुबह संदेश अपलोड किया गया कि कल पेशी के टाइम मुजफ्फरनगर कोर्ट में उमड़े अपार जनसमूह के लिए सबका आभार मैं वादा करता हूं कि चाहे एक नहीं सौ बार रासुका लगे लेकिन मैं अपनी बहनों के सम्मान की लड़ाई ऐसी ही आप सभी के सहयोग से लड़ता रहूंगा। इससे स्पष्ट है कि जेल व पुलिस अभिरक्षा में रहते हुए मोबाइल फोन के जरिए सुरेश राना फेसबुक पर अपने संदेश लगातार अपलोड कर रहे थे। दूसरा फेसबुक एकाउंट हिन्दुत्व की दहाड़-3 का है जिसका यूआरएल https//www.facebook.com/hindutvakidahara3b है। जिस पर अनेक आपत्तीजनक चित्र व संदेश अपलोड किए गए हैं। जिससे सांप्रदायिक सद्भाव खराब हो रहा है। दिनांक 29 अक्टूबर को मोबाइल के जरिए हिन्दुत्व की दहाड़-3 ने मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर आपत्तिजनक टिप्पड़ी की है। इसी पेज पर 9 सितंबर को मोबाइल से एक पोस्ट किया गया है कि मुजफ्फरनगर के गांवों में हिंन्दुओं का नरसंहार जारी है। 4 सितंबर को हिन्दुत्व की दहाड़ पेज पर पोस्ट किया गया है कि ... मुल्लों से हम भाईचारे की बात नहीं करते जिसको अपनी मां बहन बेटी मुल्लों से ब्याहनी हो वो करे भाईचारा। जिसके बाप दादाओं ने मुल्लों का कर्ज खाया हो वो मुल्लों की करे तरफदारी। 14 नवम्बर को मोबाइल से एक अपडेट किया गया कि कुरान में लिखा है इस संसार को बनाने से पहले अल्लाह हुक्का पी रहा था हुक्के से जो धुआं निकला उससे आसमान बन गया और जो राख गिरी उससे जमीन बन गई मुझे यह बात आज तक समझ में नहीं आई कि जब यह जमीन आसमान कुछ नहीं था तो अल्लाह कहां बैठकर हुक्का पी रहा था। 5 जुलाई को मोबाइल के माध्यम से अपडेट किया गया है, मुस्लिमों से कुछ सवाल ... 1- मोहम्मद ने अपनी बेटी से निकाह किया?? ... वो भी अपनी 9 साल की बेटी से ...?? क्या एक लड़की की कोई इज्जत नहीं ?? और अपने बेटी से शादी .. ??... इस तरह की अनेक गलत, झूठी इस्लाम और मुस्लिम विरोधी पोस्ट पूरे पेज पर उपलब्ध हैं। फेसबुक पर जनता की भावनाएं भड़काकर सांप्रदायिक तनाव व हिंसा पैदा करने के षडयंत्र रचकर, घटनाओं के वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़ और बढ़ा चढ़ाकर डाउनलोड किया जा रहा है। इस प्रकार इन झूठी तोड़-मरोड़ और बढ़ा-चढ़ाकर अपलोड किए गए संदेशों से सांप्रदायिक तनाव व नफरत पैदा हो रही है, जो हिंसा का बड़ा कारण जनपद मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर और मेरठ सहित संपूर्ण उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में बना है। इन्हीं को देखकर आम जनता के विचार दूषित हो रहे हैं और भाईचारा नष्ट हो रहा है। उपरोक्त फर्जी फेसबुक एकाउंट संचालकों, शेयर करने वालों और सांप्रदायिक प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले व्यक्तियों को लोगों को भड़काया व दुष्प्रेरण किया जा रहा है और धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई जा रही है तथा विशेष समुदाय मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा करके उनके साथ हिंसा कारित करने को बढ़ावा दिया जा रहा है, यह देश की एकता, सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा है। यह कृत्य भारतीय दंड विधान की धारा 153 ए, 420, 120बी, आईपीसी व 66 आईटी के अन्तर्गत दंडनीय है। प्रार्थी के सहयोगियों में जिन्होंने इस संबन्ध में जानकारी एकत्र करने में मदद की और गवाह हैं उनके नाम शाहनवाज आलम, हरेराम मिश्र, गुफरान सिद्दीकी और असद हयात हैं जो सभी सामाजिक कार्यकर्ता हैं प्रार्थी सहित इन सभी की भावनाओं को भी आपराधिक कृत्य से ठेस पहुंची है। प्रार्थी द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों से संबधित साक्ष्य को फेसबुक एकाउंट्स उपरोक्त से सुरक्षित कर लिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित किया रिकार्ड विवेचना के समय प्रस्तुत कर दिया जाएगा। रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाई करने की कृपा करें।
दिनांक- 20 नवंबर 2013 प्रार्थी-
राजीव यादव (प्रवक्ता रिहाई मंच)
पु़त्र- श्री इन्द्रदेव यादव
द्वारा- मोहम्मद शुऐब एडवोकेट (अध्यक्ष रिहाई मंच)
110/46 हरिनाथ बनर्जी स्ट्रीट, नया गांव ईस्ट
लाटूश रोड लखनऊ, उत्तर प्रदेश,


