सपा सरकार को डुबोकर ही मानेगी क्या ब्यूरोक्रेसी !
सपा सरकार को डुबोकर ही मानेगी क्या ब्यूरोक्रेसी !
लखनऊ से अनुराग मिश्र की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल तो पिछले एक साल से खड़े हो रहे थे पर हर बार अखिलेश सरकार इसे विपक्ष और मीडिया की साजिश बताकर विषय से अपना पल्ला झाड लेती थे। लेकिन कहावत है की यदि किसी मर्ज दवा समय रहते न की जाये तो उस मर्ज को नासूर बनते देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही तस्वीर इस समय उतर प्रदेश की है जहाँ कानून व्यवस्था को समय से मजबूत न करने की चलते अब स्थिति विकराल होती जा रही है। आलम यह कि हत्या डकैती और लूट की वारदातें आम बातें हो गयी हैं। उस पर सोने पर सुहागा यह कि आम आदमी के साथ-सात स्वयम् सरकार के वरिष्ठ मन्त्री भी लचर कानून व्यवस्था के लिये सरकार को घेर रहे हैं।
सुपर मुख्यमन्त्री समझे जाने वाले कद्दावर मन्त्री मौहम्मद आजम खान ने कह दिया कि उत्तर प्रदेश की पुलिस कानून व्यवस्था के मामले में बिलकुल नाकारा है। खुद से जुड़े एक वाकये का खुलासा करते हुये उन्होंने कहा कि उन्हें फ़ोन पर धमकी देने वाले शख्स को संभल की पुलिस ने पहले गिरफ्तार किया और फिर अधिक रकम लेकर रिहा कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि फेसबुक पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है उनकी फर्जी प्रोफाइल बनायी गयी है जिस पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की जा रही हैं जिसकी शिकयत उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक तक से की पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुयी। उन्होंने माँग की कि दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाये।
अब जरा सोचिये जिस प्रदेश की पुलिस राज्य की सत्ता में नम्बर दो की हैसियत रखने वाले मन्त्री की बात न सुन रही हो उस प्रदेश में आम जनता की स्थिति क्या होगी ? यहाँ यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि स्वयम् मुख्यमन्त्री अखिलेश ने कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम यह स्वीकार किया था कि उतर प्रदेश की अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। ऐसे में बेहद मत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर उतर प्रदेश की सरकार चला कौन रहा है ? राज्य में सत्ता का केन्द्र कहाँ है ? कहा जाता है कि शासन तन्त्र इकबाल से चलता है। जो सरकार अपने तन्त्र पर इकबाल कायम कर ले जाती है उस सरकार का शासन तन्त्र सुचारू रूप से कार्य करता है और जो नहीं कर पाती शासनतन्त्र के कार्य उसी सरकार के लिये कब्रगाह बन जाते हैं। वस्तुतः मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव से यही चूक हो गयी। अपनी शालीनता और विनम्रता के चलते उन्होंने नौकरशाहों से मित्रवत व्यवहार किया। लेकिन बे-लगाम और घूसखोर हो चुकी यूपी की नौकरशाही इसे मुख्यमन्त्री अखिलेश की कमजोरी समझ बैठी है। जो किसी भी रूप में अखिलेश सरकार के लिये हितकर नहीं है।
राज्य में लोकसभा चुनावों की कवायद शुरू हो चुकी है और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव उतर प्रदेश की साठ सीटों के बदौलत प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठने का हसीन दिवा स्वप्न देख रहे हैं पर उनके इस सपने पर ग्रहण लगाने की कसम उत्तर प्रदेश की नौकरशाहों ने खा ली है। जिसे पूरा करने के लिये वो कृत संकल्पित भी दिख रही है। बार-बार की चेतावनी के बावजूद नौकरशाह सुधरने का नाम नहीं ले रहे। लचर कानून व्यवस्था के चलते पूरे राज्य में सपा सरकार की निन्दा हो रही है। जिसका लोकसभा चुनाव में सपा की सीटों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और साठ की जगह बीस सीट निकाल पाना भी सपा के लिये मुश्किल हो जायेगा। इसलिये बेहतर होगा कि मुख्यमन्त्री अखिलेश परिस्थति को समझें और नासूर बन चुकी उतर प्रदेश की कानून व्यवस्था को सँभालने के लिये कारगर कदम उठायें अन्यथा वो दिन दूर नहीं होगा जब यूपी की ब्यूरोक्रेसी सपा सरकार की कब्र खोद देगी।


