सपा सरकार ने मोदी के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया - अखिलेन्द्र
सपा सरकार ने मोदी के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया - अखिलेन्द्र
अखिलेश सरकार नैतिकता के आधार पर दें इस्तीफा, उठी माँग
आइपीएफ व सामाजिक न्याय मंच के धरने के अंतिम दिन पूरे प्रदेश से आये लोग
लखनऊ, 19 सितम्बर। मुजफ्फरनगर में जिस तरह दस दिन तक साम्प्रदायिक तनाव को फैलने दिया गया और दंगों में राज्य मशीनरी व सरकार की जो भूमिका रही है वह बड़े स्तर पर हुये राजनीतिक षडयंत्र की ओर इशारा करती है। सूबे में पहली बार लोग अपने गाँवों को छोड़कर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। आज भी इन दंगों में शामिल और इन्हें करवाने वाले जनप्रतिनिधि जिनका नाम एफआईआर में दर्ज है खुलेआम धूम रहे है। यह दुखद है, लेकिन सच है कि मुजफ्फरनगर में हुये दंगे में गुजरात जैसा मंजर दिखा है। दरअसल सपा सरकार ने देश में मोदी के खिलाफ जनवादी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों की लड़ाई को कमजोर करने का काम किया है। इसलिये इस सरकार को अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये इस्तीफा देना चाहिए।
यह बातें आज विधानसभा के सामने आइपीएफ और सामाजिक न्याय मंच के द्वारा जारी दो दिवसीय धरने के अंतिम दिन आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुये आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं। आज घरने में चंदौली, सोनभद्र, वाराणसी, गोण्ड़ा, बहराइच, बस्ती, मऊ, गाजीपुर आदि तमाम जिलों से सैकड़ों लोगों ने भागेदारी की।
घरनास्थल पर हुयी सभा को सम्बोधित करते हुये सीपीएम के राज्य सचिव का0 एस0 पी0 कश्यप ने कहा कि वामदलों ने ही पश्चिम बंगाल में सरकार में रहते हुये सबसे पहले पिछड़े मुसलमानों का कोटा अलग करने का काम किया। उन्होंने कहा उ0 प्र0 में भी सामाजिक न्याय के नाम पर जारी संघर्ष में सीपीएम पूरी ताकत से रहेंगी। घरने में आज चार राजनीतिक प्रस्ताव लिये गये जिसमें मुजफ्फरनगर दंगें में शामिल जनप्रतिनिधियों को तत्काल गिरफ्तार करने, सपा सरकार बनने के बाद पूरे प्रदेश में हुये सभी दंगों की न्यायिक जाँच कराने, अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण में पिछड़े मुसलमानों का कोटा अलग करने, निमेष कमीशन की रिपोर्ट को स्वीकार कर कार्रवाही रिपोर्ट जारी करने, अति पिछड़ों का कोटा अलग करने और कोल समेत तमाम आदिवासी जातियों को आदिवासी का दर्जा देने सम्बंधी माँगें शामिल रही। इन्हीं सवालों पर धरने द्वारा मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन भी दिया गया।
धरने पर आयोजित आमसभा की अध्यक्षता जोखू सिद्दीकी ने की और संचालन साबिर अजीजी ने किया। सभा को आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी, आइपीएफ नेता लाल बहादुर सिंह, समाजवादी नेता शिवाजी राय, वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, सामाजिक न्याय मंच के चैधरी यशवंत सिंह, महेश सिंह, मोहम्मद आरिफ अंसारी, वीरेन्द्र यादव, उ0 प्र0 बुनकर वाहनी के मो0 इकबाल अंसारी, अब्दुल गफ्फार ने सम्बोधित किया।


