नई दिल्ली। समाजवादी आन्दोलन का एक और स्तंभ गिर गया। अशोक सेकसरिया नहीं रहे। बीती देर रात उन्होंने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। देश के समाजवादी आंदोलन को सेकसरिया के जाने से गहरा धक्का लगा है।
समाजवादी समागम की तरफ से डा सुनीलम और विजयप्रताप ने सेकसरिया के निधन पर गहरा दुःख जताया है। ओड़िसा में भुवनेश्वर से करीब सवा सौ किलोमीटर दूर जगतसिंहपुर जिले के ढिंकिया में पास्को विरोधी जन आंदोलनों के सम्मेलन में जैसे ही यह जानकारी मिली, सवा सौ जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहा मौजूद जनांदोलनों के प्रमुख नेता लिंगराज, डा सुनीलम, प्रफुल्ल सामंत राय, दयामनी बाड़ला, अशोक चौधरी और अनिल चौधरी ने कहा कि अशोक सेकसरिया देश भर के जन आंदोलनों से जुड़े थे और खुद ज्यादातर जगहों पर मौजूद रहकर समर्थन करते थे। उनके निधन से देश के समाजवादी आन्दोलन को गहरा धक्का लगा है।
समाजवादी समागम के प्रमुख नेता विजयप्रताप ने कहा कि अशोक सेकसरिया असाधारण व्यक्तित्व वाले समाजवादी थे जिनकी सादगी लोगों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने समूचा जीवन समाजवादी मूल्यों के साथ जिया। सेकसरिया किशन पटनायक के करीबी रहे हैं और समाजवादी आंदोलन में रहते हुए साहित्य के क्षेत्र में महत्पूर्ण योगदान दिया।
समता ग्राम सेवा संस्थान के रघुपति ने कहा कि सेकसरिया आज हमारे बीच नहीं है पर वे समाजवादी आंदोलन के प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
गौरतलब है कि तीन दिन पहले अचानक घर में पैर फिसल जाने से अशोक सेकसरिया की कमर की हड्डी टूट गयी थी। उनका आपरेशन कोलकाता के एक निजी अस्पताल में परसों हुआ। वे ठीक भी हो रहे थे कि अचानक आज देर रात हृदयाघात से उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर के समाजवादियों में शोक की लहर दौड़ गई। देश के विभिन्न हिस्सों से समाजवादी नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।