सम्राट ! आपके पैशाचिक अट्टहास बहुत भारी पड़ेंगे आपको
मधुवन दत्त चतुर्वेदी

सम्राट !
बहुसंख्यक ईमानदार भारतीयों की भावना के दोहन के अलावा आपके भाषणों में कोई तथ्य या आंकड़े क्यों नहीं होते ? यह भावनाओं का दोहन भी आप सिर्फ देशी विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फायदे का अर्थतंत्र बनाने के लिए कर रहे होते हैं।
कालाधन या भ्रष्टाचार के खिलाफ आपने कोई सार्थक कदम नहीं उठाया है। आपकी खुद की ऐश्वर्यपूर्ण जीवनशैली और मंहगे प्रचार से तंगहाली में जीने को मजबूर ईमानदार भारतीयों को घिन आने लगी है।
संभव है घिन का ये दायरा अभी उतना न दिख रहा हो कि आप अपनी लफ्फाजी से बाज आएं। लेकिन कुछ ही दिन बाद ठगे से खड़े ये ईमानदार भारतीय आपसे अपना हिसाब जरूर पूरा करेंगे।
जो देख पा रहे हैं उन्हें तो साफ़ आपके शब्दों में, आपके हाव भाव में और आपके शातिर फैसलों में ईमानदारी के नाम पर लोगों को बेबकूफ बनाने की मक्कार ख़ुशी दिख रही है।

आपके पैशाचिक अट्टहास बहुत भारी पड़ेंगे आपको।
देशहित लोकहित के प्रतिकूल तो नहीं होता है न ?
जब तुम देश के लिए कड़े फैसलों की बात करते हो तो लोग थरथराने क्यों लगते हैं ?
क्या वाकई तुम उस देश के हित की बात कर रहे होते हो जो हमारा अपना देश है या किन्ही और देशों के हित के लिए हमें कुर्बान कर रहे हो ?

निर्मम और निर्लज्ज हैं राजभक्त। हद दर्जे असंवेदनशील हैं और वज्र मूर्ख भी।
कल गोबर्धन की सेन्ट्रल बैंक की शाखा के सामने कतार में खेत रहे एक युवक की मौत पर अभी एक ने कहा,
"अजी हार्ट अटैक से मरा है। लाइन में मरा है तो क्या ! ऐसे ही मर रहे हैं। नोटबंदी से कोई नहीं मर रहा है।"
तभी दूसरा राजभक्त बोला,

"अजी मौज आ गयी उसकी तो। अब अखिलेश 2 लाख देगा। वैसे 2 हज़ार को लाइन में खड़ा था।"

इन दो टिप्पणियों से आप देख सकते हैं, राजभक्तों के बुद्धि विवेक और भावनाओं का स्तर क्या है ! इन्हें कोई कैसे समझाए कि नोटबंदी मेडिकल साइंस में वर्णित बीमारी नहीं जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आएगी।
यह कोई तीर तलबार या गोला बारूद भी नहीं कि फोरेंसिक रिपोर्ट बताये।

यह हालात हैं जो मोदी सरकार ने बनाये हैं और जिनकी वजह से ये मौतें हुई हैं।
जहाँ तक राज्य सरकार से मिलने वाली मरणोपरांत मदद का सवाल है, कोई भी उसके लिए अपने घर के सदस्य की मौत कैसे चाह सकता है ! राजभक्त अपने घरों में यह फायदा लेना चाहेंगे क्या ?