सरकार किसी की बने, मोदी पीएम नहीं बनेंगे
सरकार किसी की बने, मोदी पीएम नहीं बनेंगे
देवेन्द्र सुरजन
दिल्ली में परसों का दिन नरेन्द्र मोदी का था और कल का नीतीश कुमार के नाम। ये दोनों प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार माने जा रहे हैं। एक भारत के पश्चिमी कोने तो दूसरा पूर्वी सिरे का प्रतिनिधित्व कर रहा है। मजे की बात ये है कि दोनों एक ही गठबंधन के अंग हैं लेकिन एक दूसरे को बिलकुल नहीं सुहाते। समाचार जगत को इनके बीच शीत युद्ध नजर आता है अतः वह भी चुटकिया लेने से बाज नहीं आता लेकिन सबसे अच्छी बात ये हो रही है कि लफ्फाजी से परे हटकर दोनों विकास की बातें कर रहे हैं।
मोदी जहाँ गुजरात माडल का गान कर रहे हैं वहीं नीतीश कुमार बिहार माडल को बिहार और देश के विकास के लिये अधिक कारगर मानते हैं।
नितीश कुमार को प्रधानमन्त्री बनने की कोई जल्दी नहीं है जबकि नरेन्द्र मोदी बिलकुल उतावले हुये जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की पार्टी भाजपा में भी कोई ऐसा नहीं जो तुरन्त प्रधानमन्त्री बनने की सोचे, इसलिए मोदी को आगे करके उनके मन में लड्डू फुड़वाये जा रहे हैं।
चूँकि नितीश को जल्दी नहीं है इसलिए लगता यही है कि कांग्रेस उनके लिए चारा डालेगी और वे उसमें फँसते चले आयेंगे। राहुल प्रधानमन्त्री बनना नहीं चाहते और मनमोहन को प्रधानमन्त्री अब बनाया नहीं जायेगा इसलिए चिदम्बरम का नाम इस पद के लिए चल पड़ा है। नितीश ने इस बात को 27 फरवरी को ही पकड़ लिया था और तबसे वे एकाधिक बार चिदम्बरम की प्रशंसा कर चुके हैं।
जहाँ तक शरद यादव के द्वारा नितीश को सम्भावित रूप से सेबोटाज़ करने की बात है वह फिलहाल युक्तियुक्त नहीं लगती। किसी सांसद या गठबन्धन के संयोजक से
मुख्यमन्त्री अधिक ताकतवर होता है और शरद उसकी मर्जी के बिना किसी पत्ते को भी खड्का पायेंगे, सम्भव नहीं दिखता। वैसे शरद प्रधानमन्त्री बनें और वे फिर जबलपुर को रोशन करें, ऐसा कम से कम मैं तो चाहूँगा। छींका कब और किसके भाग्य से टूटेगा - यह उस पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस एक तरफ नितीश को पुटियाने का प्रयास करेगी तो दूसरी ओर बीजू जनता दल, जो राजग से कुछ दूरी बनाकर लम्बे समय से चल रहा है - को भी पुटियाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
आज करूणानिधि ने संप्रग से सम्बन्ध विच्छेद के संकेत दिये हैं और यदि वे सचमुच ऐसा कर लेते हैं तो नितीश और नवीन को संप्रग फोल्ड में लाने फौरी प्रयास कांग्रेस द्वारा किये जावेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं किया जाना चाहिये।
एक बात जो सर्वाधिक महत्व की है वह यह कि मोदी की बनिस्बत नितीश अधिक सर्वस्वीकार्य नेता हैं और 2014 में सरकार चाहे जिस गठबन्धन की बने मोदी को प्रधानमंत्रित्व कोई नहीं देने वाला, इतना निश्चित है।


