सहकारी बैंकों और समितियों से रोक न हटी तो बर्बाद हो जायेगा किसान : शिवपाल
सहकारी बैंकों और समितियों से रोक न हटी तो बर्बाद हो जायेगा किसान : शिवपाल
सहकारी बैंकों और समितियों से रोक न हटी तो बर्बाद हो जायेगा किसान : शिवपाल
लखनऊ, 20 नवंबर। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि सहकारी बैंकों और सहकारी समितियों पर रुपयों के लेन-देन की लगी रोक नहीं हटाई गयी तो किसान बर्बाद हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रूपये के नोट बंद करने आदेश से किसान परेशान है। किसानों के पास खाद, बीज तथा अन्य सामान खरीदने के लिये पैसा नहीं है। किसानों को लेन देन सहकारी बैंको और संस्थाओं द्वारा किया जाता रहा है। केन्द्र सरकार ने इन पर रोक लगा दी है।
श्री यादव ने कहा कि यदि सहकारी बैंकों और संस्थाओं पर लगी रोक नहीं हटाने से किसान बर्बाद हो जायेगा।
किसान ही बर्बाद हुआ तो देश में भुखमरी फैल जायेगी। जिला सहकारी बैंकों और सहकारी समितियों से रोक न हटने पर इन पर कार्यरत कर्मचारी भी बेरोजगार हो जायेंगे।
आज यहां जारी एक बयान में सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो आज किसानों को छूट दी है वह मात्र एक झुनझुना है। सरकारी दुकानों से बीज और खाद खरीदने की छूट दी गयी है वह ना काफी है और ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
श्री यादव ने कहा कि इफको और कृभको केन्द्र सरकार की संस्थाएं है। इनके द्वारा दिया गया सामान पीसीएफ के माध्यम से जिला सहकारी संस्थाओं तक पहुंचता है। संस्थाओं के माध्यम से बीज और खाद आदि सामान किसानों तक पहुंचता है। किसानों का पैसा जिला सहकारी बैंकों में होता है। इसके अलावा किसानों को खाद तथा बीज खरीदने के लिए सस्ते दरों पर जो ऋण दिया जाता है, वह सहकारी बैंक देते हैं।
उन्होंने कहा कि जिला सहकारी बैंकों पर प्रधानमंत्री ने रुपयों के लेन देन पर रोक लगा रखी है जबकि इन बैंकों को लाइसेंस भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ही दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सूदखोरों से छुटकारे के लिए ही 1958 में सहकारी संस्थाएं बनायी गयी थीं। इनका असली मकसद ही किसानों के हित में काम करना है। यह संस्थाएं 1958 से ही अपने गठन के अनुरूप काम करते हुए किसानों को बहुत ही कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराती हैं। किसान बीज और खाद से अपनी उपज तैयार कर सके। किसानों का पैसा सहकारी बैंकों में जमा है।


