जनतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए राष्ट्रीय कन्वेन्शन
27 फरवरी 2014, नई दिल्ली
हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग (गांधी शान्ति प्रतिष्ठान के पास) नई दिल्ली
उद्घाटन: दिन में 10 बजे
आयोजक: पीपुल्स अलायन्स फॉर डेमोक्रेसी एण्ड सेक्युलरिज्म
साम्प्रदायिक राजनीति का खतरा फिर एक बार पूरे देश में मंडरा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हाल की हिंसा एक तरह से चेतावनी है। इसी से जुड़ा मामला है जनता के एक हिस्से में अधिनायकवादी/तानाशाही मार्का समाधानों की तरफ बढ़ता आकर्षण। आने वाले आम चुनाव एक तरह से एक विभाजक रेखा साबित हो सकते हैं। एक वास्तविक ख़तरा नज़र आ रहा है कि ऐसी राजनीतिक ताकतें जिन्होंने धर्म, भाषा या उपराष्ट्रीय पहचानों के आधार पर आम नागरिकों के जनतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन किया है, वह एक अधिनायकवादी और फासीवादी राज्यसत्ता कायम करने के अपने दूरगामी मकसद में कामयाब हो जाएं। खतरा सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए नहीं है, एक अधिनायकवादी राज्य सभी भारतीयों के जनतांत्रिक अधिकारों पर हमला करेगा।
हाल के घटनाओं की जड़ें गहरी हैं। हालांकि भारतीय राज्य सेक्युलर संविधान के तहत संचालित होता है, सभी रंगों की साम्प्रदायिक ताकतें हमारे समाज में फल-फूल रही हैं। यह सभी असहिष्णुता, पितृसत्तात्मक रूख और ‘आहत भावनाओं’ के नाम पर हिंसा फैलाने की आदी हैं। लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां साम्प्रदायिक पहचानों और भावनाओं का इस्तेमाल करती हैं। साम्प्रदायिक प्रवृत्तियां मीडिया, नौकरशाही और लोकप्रिय संस्कृति में भी मौजूद दिखती हैं। न ही उन्हें व्यापक स्तर पर फैले जातिवाद और जेण्डर हिंसा से अलग किया जा सकता है। सभी भारतीय जो अपने जनतांत्रिक अधिकारों की अहमियत जानते हैं, जिनमें मेहनतकश गरीब, स्त्रिायां, उत्पीड़ित जातियां और अल्पसंख्यक शामिल हैं, उन सभी को साम्प्रदायिक-अधिनायकवादी ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलन्द करनी चाहिए। ऐसे लोग ही भारतीयों का विशाल बहुमत है, लेकिन हम देखते हैं कि ऐसी कोई सशक्त राजनीतिक ताक़त मौजूद नहीं है जो जनतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत की हमारी आकांक्षाओं को लामबन्द कर सके और उनके लिए संघर्ष कर सके।
जनतांत्रिक संस्थाओं और आचारों को मजबूत करके ही साम्प्रदायिकता का मुकाबला किया जा सकता है और उसे परास्त किया जा सकता है। ‘पीपुल्स अलायन्स फॉर डेमोक्रेसी एण्ड सेक्युलेरिजम(पी ए डी एस) जनतांत्रिक और साम्प्रदायिकता विरोधी संगठनों एव व्यक्तियों का एक साझा प्रयास है जिसका मकसद है भारतीय समाज में जनतंत्रा और धर्मनिरपेक्षता की जड़ों को और गहरा कर देना। वह 27 फरवरी को दिल्ली में ‘जनतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए’ एक राष्ट्रीय कन्वेन्शन का आयोजन कर रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों में सक्रिय तमाम जनतांत्रिक और साम्प्रदायिकता विरोधी संगठन और व्यक्ति इसमें शामिल हो रहे हैं। कन्वेन्शन के जरिए साम्प्रदायिक-अधिनायकवादी ताकतों का विश्लेषण करने, उनसे मुकाबला करने के लिए योजना तैयार करने और रणनीति बनाने की कोशिश होगी। आने वाले आम चुनावों के मद्देनज़र तथा जनतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष समाज बनाने के दूरगामी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए चर्चा होगी।
पीपुल्स अलायन्स फॉर डेमोक्रेसी एण्ड सेक्युलैरिजम सभी जनतांत्रिक और साम्प्रदायिकता विरोधी संगठनों और व्यक्तियों से अपील करता है कि वह नेशनल कन्वेन्शन के आयोजन का समर्थन करें और इस प्रक्रिया में शामिल हो।
पहला सत्र
फासीवाद की चुनौती का मुकाबला करते हुए: जनतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को व्यापक बनाने
(10 बजे से 1 बजे तक)
दूसरा सत्र
साम्प्रदायिकता के प्रतिरोध के लिए राजनीतिक रणनीतियां: ग्रासरूट के अनुभव
(2 से 4 बजे तक)
तीसरा सत्र
आगे की योजना
(4 बजे से 6 बजे तक)