इस खबर के लिहाज से यह सरकार सैनिकों की हत्या की दोषी है और उसे जरूर इसका देश को जवाब देना चाहिए
सियाचिन में 10 सैनिकों को बचाया जा सकता था,
तथागत सत्पथी का संसद में सनसनीखेज खुलासा
महेंद्र मिश्रा
एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वह यह कि सियाचिन की बर्फ में दबे 10 सैनिकों को बचाया जा सकता था। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। शायद उसे बचने से ज्यादा उनके मरने में फायदा था।
दरअसल हादसे के तुरंत बाद पाक सैनिकों की तरफ से भारत सरकार के पास यह प्रस्ताव आया था कि वो घटनास्थल के बहुत नजदीक हैं और अगर सरकार इजाजत दे तो वो उनकी जान बचा सकते हैं। लेकिन भारत सरकार ने मदद लेने से इनकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 9 सैनिक उसी में दबकर मर गए।

जिस एक सैनिक हनुमंथप्पा को जीवित निकाला जा सका उसने भी बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। प्रधानमंत्री जी उस शहीद को देखने अस्पताल गए थे। आईसीयू में उन्होंने फ़ोटो भी खिंचवाई थी, लेकिन उसे बचाने के लिए जो प्रस्ताव आया था उसे उन्होंने ख़ारिज कर दिया, क्योंकि बचाने से ज्यादा उसकी शहादत को बेचने में उनको फायदा दिखा। नहीं तो क्या वजह है कि दोनों देशों के सैनिक सीमा पर होली और दीवाली के मौके पर एक दूसरे को मिठाई भेंट कर सकते हैं, लेकिन जब किसी की जान आफत में पड़े तो उसे बचाने से परहेज किया जायेगा।
पीएम साहब नवाज के घर बिरियानी खाने जा सकते हैं, लेकिन सैनिकों की जान बचाने में सहयोग नहीं ले सकते। इस खबर के लिहाज से यह सरकार सैनिकों की हत्या की दोषी है और उसे जरूर इसका देश को जवाब देना चाहिए। इस बात का खुलासा बीजेडी के सांसद तथागत सत्पथी ने लोकसभा में किया है, उसका लिंक इस पोस्ट के साथ जुड़ा हुआ है। चाहें तो आप देख सकते हैं ।