हमने टालना चाहा लेकिन वह जिद्दी था और पुराना दोस्त। न समाजवादी था न ही कांग्रेसी। वह खुत्थड़ हाफपैंटी था। हमने कहा तुमको अगर यह भ्रम हो कि हम किसी दलीय सोच या पूर्वाग्रह से इस सरकार पर बोलेंगे तो उसे निकाल दो। सुनना ही चाहते हो तो सुनो - इस समय देश में जितने भी सूबों की सरकारें हैं उनमें उत्तर प्रदेश की सरकार सबसे बेहतर है और स्वच्छ है और पारदर्शी है। लेकिन इसमें एक ही कमी है जो कि कांग्रेस में भी है कि यह उत्तेजक नारे नहीं दे रही है। झूठ फरेब पाखण्ड और छल प्रपंच के सहारे जनता को भ्रमित नहीं कर रही है। यह इसकी सबसे बड़ी असफलता है। सरकार यह उम्मीद रखती है कि जो कुछ भी हो रहा है वह तो जनता देख ही रही है। लेकिन इन दोनों दलों को यह नहीं मालूम कि जनता ने अब देखने का नजरिया बदल दिया है। वह सड़क पर, गाँव में, घर में क्या हो रहा है उसे वह अपनी नजर से नहीं देख पाती उसे डिब्बे के की जरूरत है। सुबह वाले कागद की जरूरत है, वह जो दिखाता है वह उतना ही देख पाती है। इसे कहते हैं मीडिया की नजर से देखना। मजेदार बात यह कि आज मीडिया के पास खुद नजर नहीं है केवल पेट है। उस पेट को भर दो और उसके कान में फूंक दो कि कौव्वा कान लेके भागा, वह इसका रिकार्ड चला देगा और जनता मुंह बाएं उसे देखती और सुनती रहेगी।
वरना उत्तर प्रदेश को देखो। इस सरकार को देखो। सबसे ज्यादा ईमानदार मंत्री इस सरकार में हैं। राजेन्द्र चौधरी, राम गोविन्द चौधरी, ओम प्रकाश सिंह, सुरेन्द्र पटेल। और बहुत से नाम हैं। खुद अखिलेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। इतना ही नहीं, भाई मुलायम सिंह को देखो। अपनी ही सरकार की आलोचना करने से नहीं चूकते। जो काम प्रतिपक्ष को करना चाहिए उसे मुलायम जी पूरा कर रहे हैं। इस सरकार को किससे नापना चाहते हो ? मध्य प्रदेश, गुजरात छत्तीसगढ़ ? तमिल नाडु, महाराष्ट्र ? कोई भी नाम ले लो। वहाँ के सरकारी अपराध, सरकारी भ्रष्टाचार चरम पर है लेकिन मीडिया खामोश है।
इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में दबंग मंत्री भी हैं। शिव पाल यादव को देख लीजिए। इस बार की सरकार में शिवपाल यादव ने जो काम किये, उसे मीडिया ने अनदेखा किया। उदाहरण के लिए जब किसान को सूखे की मार पड़ रही थी तो शिवपाल ने अतरिक्त मेहनत कर के नहर को पानी से भरा। कागज़ पर फरमान निकाल कर नहीं, नहर के किनारे खड़े हो कर। दबंगई का आलम यह था कि कोई अधिकारी इस बात से डरता था कि मंत्री जी कब आ जायं, कोई भरोसा नहीं। हाँ, सड़कों के मामले में जितना काम उन्होंने पश्चिमी हिस्से में किया उतना पूर्वी में नहीं। सड़कें बदहाल हैं। शिकायत तो है ही। हमने पर्यटन मंत्री से कहा कि यह बात उनके सामने जाने चाहिए। और अगर दो दिन का भी कार्यक्रम पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में लगा तो बहुत सारी सड़कें 'अपने आप ' गड्ढे से मुक्त हो जायंगी।
इतना ही नहीं अगर शिवपाल यादव मात्र दो प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचा दें, तो इस सरकार का कोई जवाब नहीं। एक चंदौली के भोपौली पम्प हाउस का शुभारंभ। यह इलाका लघु और सीमांत किसानों का है। यह समाजवादियों का गढ़ रहा है। उन्हें पानी की किल्लत से राहत मिलेगी। दूसरा है कन्हार प्रोजेक्ट। यह सोनभद्र से चलाय्त पलामू तक। उत्तर प्रदेश ही नहीं नक्सल प्रभावित पूरा इलाका लहलहा उठेगा। बारह सौ करोड़ की यह योजना अगर युद्ध स्तर पर शुरू कर दी जाय तो पूर्वी हिस्से की भी काया बदल जाय।
हमें क्या, हम तो कांग्रेसी हैं। जितनी दूरी पर हाफ पैंट हमसे बनाए खड़ा है उससे कम दूरी पर हम इस सरकार से हैं। लेकिन सुनता कौन है भाई। एक सड़क की मरम्मत हम भी मांग रहे हैं। समताघर से सिंगरामऊ तक। जिस से प्रति दिन बारह सौ लड़के साइकिल से आते जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश की सड़क चमक जाय तो यह सूबा खुद खुद चमक जायगा। सुन ऐ चड्ढी एक बात
सुन ले ! यह जो तुम्हारी केन्द्र की सरकार है न उससे बेहतर तो यह सूबे की सरकार है।
O- चंचल
चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं।