रोली शिवहरे

केन्द्र सरकार यह तय कर चुकी है कि वह राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाने के केन्द्रीय सूचना आयोग के निर्णय को लागू नहीं करेगी और इस हेतु वह कानून में परिवर्तन करने जा रही है। देशव्यापी विरोध के बावजूद इस हठधर्मिता में भिन्न विचारधाराओ वाले सभी दल शामिल हैं। उनकी इस कार्यवाही से कमोवेश उस विचार को पुनः बल मिला है कि कानून बनाने एवं उसमें परिवर्तन की प्रक्रिया जनमत संग्रह से गुजरे।

राजनीतिक गलियारों में हलचल है। आश्चर्जनक रूप से सभी दलों के नेता एक स्वर में एक जैसी बात कर रहे हैं। अपनी-अपनी ढपली बजाने वाले एकजुट इसलिये हैं, क्योंकि इस बार तलवार उन पर ही लटकी है। हाल ही में केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा दिए गए फैसले ने इनकी नींद उड़ा दी है। यह फैसला राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के सन्दर्भ में है। इस आदेश को देश भर में वाहवाही मिल रही है, इसका स्वागत किया जा रहा है और दुखी हैं तो सिर्फ राजनीतिक दल।

कांग्रेस के प्रवक्ता कहते है कि इससे लोकतान्त्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुँचेगा। वहीं भारतीय जनता पार्टी और जनता दल के नेताओं का कहना है कि दलों से सवाल करने के लिये चुनाव आयोग काफी है और सूचना आयोग को उन पर सवाल करने का कोई हक नहीं। इसी प्रकार वाम दलों ने भी इस आदेश पर नाराजगी दिखाई है। कुछ नेताओं का कहना है की वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

यह फैसला 3 जून 2013 को केन्द्रीय सूचना आयोग की पूर्ण पीठ जिसमें की मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानन्द मिश्र और सूचना आयुक्त के रूप में एम. एल. शर्मा एवं श्रीमती अन्नपूर्णा दीक्षित द्वारा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राईटस और सुभाष अग्रवाल द्वारा लगायी गयी याचिका के सम्बन्ध में दिया गया। यह प्रक्रिया 2010 से शुरू हुई जब एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राईट्स) छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस दल) व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को मिलने वाले चन्दे की जानकारी माँगी। तब इन सभी दलों ने यह कहते हुए सूचना देने से मना कर दिया कि वे सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं आते।

अब सवाल यही उठता था कि ये सभी सूचना के अधिकार के दायरे में आते हैं कि नहीं? इस बात को लेकर केन्द्रीय सूचना आयोग में शिकायत दर्ज की गयी। उस शिकायत पर करीब ढाई वर्ष लगातार सुनवाई पर सुनवाई होती रही। अंत में 3 जून को आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने का आदेश पारित किया गया। इस आदेश में आयोग द्वारा मुख्य रूप से सूचना का अधिकार कानून की धारा 2(ज) का उपयोग किया है, जो स्पष्ट तौर पर कहती है की “’कोई ऐसा गैर सरकारी संगठन जो समुचित सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई निधियों द्वारा सारभूत रूप से वित्त पोषित हो’। इस धारा से यह स्पष्ट है कि राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में आना चाहिए क्योंकि उन्हें कई जगह सस्ती दरों या फिर मुफ्त में सरकार द्वारा जमीन दी गयी है। आयकर कानून के तहत भी इन पार्टियों को आयकर में पूरी तरह से छूट है।

इसके हमारे लोकतान्त्रिक ढांचे में इन दलों द्वारा जो भूमिका निभाई जा रही वह उनके सार्वजनिक चरित्र की ओर इशारा करती है। साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम की प्रस्तावना में यह स्पष्ट है कि यह एक ऐसा कानून है जो भ्रष्टाचार को रोकने के लिये और शासन को जनता के प्रति जवाबदेहिता लाने में मदद करेगा। इसलिये राजनीतिक दल भी उनके सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की घोषणा करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक दलों के लिये चन्दे में पारदर्शिता लाना लोकतांत्रिक ढाँचे में महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यही से राजनीतिक भ्रष्टाचार शुरू होता है। पिछले कुछ समय से बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने द्वारा राजनीतिक दलों को चुनाव के लिये धन दिये जाने के आरोप लगे हैं कि जिसकी वजह से कई बार नीतियों में उनके हिसाब से परिवर्तित करने की बात भी सामने आई है। ‘इलेक्शन वाच’ नामक एक संगठन के विश्लेषण में यह साफ निकलकर आया है कि कई कॉर्पोरेट घराने दोनों ही पार्टियों (सत्ताधारी, विपक्ष) को चंदा देते हैं।

पारदर्शिता के बारे में तो सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश में स्पष्ट किया था कि चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को अपनी संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड, शिक्षा इत्यादि की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। ऐसा करने के पीछे मंशा सिर्फ यह थी कि जनता जिस व्यक्ति को चुनने वाली है उसके बारे में उसे संपूर्ण जानकारी हो। इसलिये लोकतंत्र की बातें करने वाले दल पारदर्शिता अर्थात सूचना के अधिकार के दायरे से दूर क्यों रहें? इसके अलावा राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने से इन दलों के आंतरिक लोकतंत्र को भी मजबूती मिलेगी।


लेखिका NCPRI व MP Election watch की राज्य संयोजक हैं |