सूत्र –संपर्क – सत्ता
सूत्र –संपर्क – सत्ता
कुछ पत्रकार बेचारे अभी भी पेड न्यूज की दुनिया में जी रहे हैं । ऐसे लोग खाते हैं ,कमाते हैं और भ्रष्टाचार के गुण गाते हैं । मालिक के सामने सिर झुकाते हैं । मालिक का मतलब मालिक नहीं होता । कोई भी हो सकता है । यहां तक आपका मोबाइल फोन भी हो सकता है । अब तो नेता भी मोबाइल फोन से शरमाते हैं । अपनी शरम के ऊपर सरकार के गठबंधन धर्म का बुरका ओढ़ लेते हैं । न किसी को नेता की कमसिन लाज दिखेगी , न किसी को भ्रष्टाचार की खाज दिखेगी ।
लोग बहुत भ्रष्टाचार – भ्रष्टाचार बकते हैं । कुछ तो इसे करने के लिए बेकरार रहते हैं । हम जैसों फटीचरों को कोई पूछता नहीं , इसलिए ईमानदार बने रहते हैं । जिनकी पूछ होती है वह पद्मश्री से लेकर सेमिनार श्री कहलाते हैं । दिल्ली में रहते हैं , दिल्ली के गुण गाते हैं । अच्छी बात है न । ऐसे लोग भी हैँ जो दिल्ली में रह कर न्यूयॉर्क के गुण गाते हैं । थोड़ा मन देसी हुआ यानी विजा ना मिला तो नागपुर के गुण गाते हैं । और एक दम से जमीन से जुड़ना चाहें तो बिहार हो जाते हैं । बिहार की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने वाली है । मिटा दो भाइ । चुनाव में जात पात मिटा सकते हो तो सरकार में भ्रष्टाचार ही मिटा दो । देखना है जोर


