स्पेशल सेल मोदी अजेंडे पर काम न कर संविधान के लिए काम करे, संभल को बदनाम करने से बाज़ आये: अमीक़ जामेई
नई दिल्ली। आतंकवाद को डील करने के मामले देश में सबसे बदनाम एजेंसी दिल्ली की स्पेशल सेल बनके उभरी है। इन बातों का इज़हार संभल में आसिफ नाम के युवक को अल क़ायदा के सरगना बनाके बताने के बाद फ़र्ज़ी आतंक के नाम पर फँसाए गए युवकों की रिहाई के लिए बनी तंज़ीम पीपुल्स कैम्पेन अगेंस्ट पॉलिटक्स आफ टेरर (पीसीपीटी) के संस्थापक सदस्य अमीक़ जामेई ने कही है!
अमीक़ जामेई ने कहा उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के बाद संभल को फिर आतंक के मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है, जो कि बेहद खतरनाक है। एजेंसियों की चाहिए कि मीडिया ट्रायल के ज़रिये खुद को हीरो बनाकर मेडल की चाहतें रखने वाले सबसे पहले उन्हें कसूरवार लोगों के प्रति पूरी जानकारियाँ जुटानी चाहिए, फिर गिरफ्तार कर पुख्ता जाँच कर सारे सबूत अदालत के सामने रख कर उन्हें सज़ा दिलवाए, लेकिन दिल्ली की स्पेशल सेल का रिकॉर्ड कोर्ट में बहुत बदनाम है। आज तक सबूत न इकठा होने की वजह से 10 या 15 साल बाद बताये गए आतंकी छूट जाते हैं।
अमीक़ जामेई ने पूछा कि किसी भी शख्स को देश का सबसे खतरनाक आतंकी बनाकर अदालत के ज़रिये बेक़सूर बताकर छोड़ दिए जाने पर ऐसा क्यों न हो कि कोर्ट और संसद के प्रति अफसरों की ज़िम्मेदारी तय की जाये? ऐसा क्यों न हो स्पेशल सेल के अफसरों के मेडल और अवार्ड उनसे वापस लिए जायें?
संभल के मामले जामेई ने कहा कि संभल से आसिफ के परिवार ने उनसे संपर्क किया है। वह बता रहे हैं कि आसिफ दिल्ली से कपड़े खरीदकर संभल में बेचने का काम करता है और घर में उनके खाने तक को नहीं है। उन्होंने कहा कि यह इलज़ाम सरासर ग़लत है कि उसने कई मुल्कों का सफर किया है। उनके मुताबिक वह एक साल के लिए सउदिया जा कर रहा है। हां, आसिफ तब्लीग़ से जुड़ा रहा है, तो क्या दीन का काम करना जुर्म है?
पीपुल्स कैम्पेन अगेंस्ट पॉलिटक्स आफ टेरर (पीसीपीटी) के संस्थापक सदस्य अमीक़ जामेई ने इलज़ाम लगाया कि जब मोदी सरकार की थू-थू हो रही है, सरकार फेल हो रही है, जनता के सामने उसकी साख कमज़ोर हो रही तो स्पेशल सेल ध्यान भटकाने के लिए आतंक की राजनीति कर लोगों का ध्यान भटकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह स्पेशल सेल के झांसे में न आये और खुद एक इस मामले पर जाँच बिठाकर सच का पता करे। अगर अखिलेश सरकार ने निमेष कमीशन में बताये गए दोषी अफसरों पर कार्रवाई की होती तो आज आतंक और मेडल जीतने की राजनीति एजेंसियों में कमज़ोर होती। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा नहीं हो रहा है कि अल क़ायदा के नाम पर आसिफ को ब्रांड कर बहुसंख्यक समुदाय में मुसलमानो के प्रति नफरत का माहौल नहीं बनाया जा रहा है?
अमीक़ ने संसद से गुज़ारिश और मांग की है कि दिल्ली स्पेशल सेल को संसद के प्रति अकाउंटेबल बनाने की तरफ बढ़ा जाये और सेल से बेक़सूर युवाओ की ज़िंदगियाँ बर्बाद करने की ज़िम्मेदारी डाली जाये।