कश्मीर के पुलवामा (Pulwama of Kashmir) में 2800 से ज्यादा जवानों का कानबाय (Convoy of the jawans) गुजर रहा था। जब कभी ऐसा काफिला गुजरता है तब एडवांस पार्टी पहले निकलती है। हर 500 मीटर पर चौकसी जवान होते हैं। इसके बावजूद अनंतनाग बाईपास (Anantnag bypass) पर काफिले के रास्ते में कार आ गयी। जिसमें 200 किलो बारूद था। हमारे 39 जांबाज जवान शहीद हो गए।

अब एक एक शहादत का बदला लेने की हुंकार भरी जा रही है लेकिन एक तो इंटेलिजेंस फेलियर (Intelligence Failure) दूसरा नियमानुसार सुरक्षा और चौकसी न होना।

पाकिस्तान को कोसने से पहले खुफिया और रास्ते की सुरक्षा के लिए प्रभारी पर कार्यवाही करो। हमारा जेम्स बांड इन सब मसलों पर काम करने की जगह राजनीतिक उठापटक कर रहा है।

जिम्मेदारी तय हो। राजनीति मत करो। हमारे 39 जवानों की शहादत का एक कारण हमारी कोताही है। हम भले गाली पाकिस्तान को दें लेकिन आतंकी वहीं पुलवामा का ही था।

आखिर वह कौन है जिसने 350 किलो विस्फोटक वह भी आर डी एक्स पहुंचाया। उसे ट्रेनिंग किसने दी और आतंकी तक काफिला गुजरने की सूचना कैसे उस तक पहुंची। यह भी जांच का मसला हो।

(वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणी)

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