हम क्रिकेटप्रेमी लोग
हम क्रिकेटप्रेमी लोग
जुगनू शारदेय
हमारे रिक्शेवाले को नहीं पता था कि देश में कोई विश्व कप भी हो रहा है । हमें लगा कि हमारा रिक्शा वाला और ज्यादा गरीबी रेखा से नीचे हो गया है । हालांकि वह भी गरीबी रेखा से नीचे नहीं समझता ,पर बीपीएल समझता है । कई एक दफा उसने मुझसे कहा भी कि साहब मुझको भी बीपीएल कर दीजिए न । मैं हमेशा ऐसे सवालों पर मन्नु भाई मुनीम हो जाता हूं । एक सवाल को दूसरे के यहां उत्तर के लिए भेज देता हूं । मांगा था जेपीसी कड़कड़ाती सरदियों में महकता वसंत में उसे पाता हूं । मैं चाहता हूं कि रिक्शावाला भी कहीं बीपीएल की मांग को ले कर जाए , वह सिर्फ सवारी ले कर ही जाता है । सवारी स्टेडियम की तरफ अभी नहीं जाता है बल्कि महंगाई का मारा डिसकाउंट सेल की मार्केटिंग के आकाश में लटका रहा ।
उम्मीद थी कि दोस्त का ड्राइवर स्कोर पूछेगा । उसने पूछा ही नहीं । अपनी गाड़ी के रेडियो पर भी वह यही सुन रहा था कि रेडियो सुनने वाले हमेशा खुश । मैंने ही उससे पूछा कि स्कोर क्या है , उसने जवाब दिया किस फिल्म का गाना है । आप मेरी निराशा समझ सकते हैं कि न रिक्शेवाले पर , न ड्राइवर पर चढ़ा था क्रिकेट फीवर । हमारे रनबांकुरे टेलीविजन के प्रोग्राम के अटके हुए हैं ।
टेलीविजन की बात चली तो हमारे एक टेलीविजनी मित्र ने बताया कि एक दौलत और खूननुमा चैनल पर वीना मल्लिक और राखी सावंत विश्व कप के बारे में कमेंटरी
करती है । मित्र ने कहा कि सबकी टीआरपी तो मौत का खेल खेलने वाले टेलीविजन चैनल के आंचल के ऊपर समा जाता है क्योंकि वहां वीना मल्लिक और राखी सावंत विश्व कप के बारे में कमेंटरी करती हैं । मतलब यह हुआ कि कोई विश्व कप हो रहा है और इस विश्व कप का सारा माल इसी टेलीविजन चैनल ने झटका हुआ है ।
यहां अखबार में खबर है कि लोग ही नहीं देखने आ रहे हैं क्रिकेट मैच ।
कॉमन सेंस माय डियर वाटसन ,अगर मैं शरलॉक होम्स होता तो कहता , यह तो मामूली सी जगजाहिर बात है कि सामने टेलीविजन है तो स्टेडियम में कौन जाए
। आईसीसी के प्रवक्ता को यह बहुत निराशाजनक लगा क्योंकि कमाई थोड़ी कम हुई । क्रिकेट में कमाई कम हुई ,यह कुछ कुछ वैसा ही है कि इंडिया में भ्रष्टाचार कम हो गया है । क्रिकेट और भ्रष्टाचार का भी आपसी रिश्ता है । कुछ बुकी होते हैं तो हर रन पर दांव लगाते हैं । किसी ने तो इंडिया के विश्व कप जीतने पर ही करोड़ों का दांव लगाया है । ऐसा लगता है कि अपने देश में क्रिकेट के साथ कुछ खटका हुआ है ।
यह सिर्फ हमारे मुल्क में ही नहीं हर उस मुल्क में हो रहा है , जहां क्रिकेट का विश्व कप खेला जा रहा है । हम तो 1983 में जी रहे हैं । तब बिल्ली के भाग से झींका टूटा था । हमने विश्व कप जीता था । तब से हम इस गलतफहमी में जी रहे हैं कि हर बार जब क्रिकेटिया विश्व कप होगा तो विश्व कप हमारे खाते में ही होगा । यह बेचारा कप कहीं और चला जाता है । कप न हुआ 2 जी स्पेकट्रम का लायसेंस हो गया जो इधर उधर बंटता रहता है ।
हम भारत के लोग , जैसा भारत के संविधान के हिंदी अनुवाद में लिखा है , बार बार बेवकूफ बनते हैं । राष्ट्रमंडल के खेलों में नहीं शामिल क्रिकेट – शामिल तो नहीं राष्ट्रमंडल के खेलों में भ्रष्टाचार भी है पर राष्ट्रमंडल की गुलामी ही नहीं खेल से कैसा बनाओ यह भारत ने लोगों को सिखाया है । हम क्रिकेटप्रेमी लोग का मन उसी में भटकता है ।


