हर मोर्चे पर/ तैनात कर दिये गये हैं/ क़ातिल/ जो रात के अंधेरे में/ मुस्तैदी के साथ/ आगे बढ़ते आ रहे हैं
हर मोर्चे पर/ तैनात कर दिये गये हैं/ क़ातिल/ जो रात के अंधेरे में/ मुस्तैदी के साथ/ आगे बढ़ते आ रहे हैं
अंधेरे के बीच
ख़ामोशी एक साज़िश है
जो हत्यारे की छूरी पर
सान चढ़ा रही है.
हर मोर्चे पर
तैनात कर दिये गये हैं
क़ातिल
जो रात के अंधेरे में
मुस्तैदी के साथ
आगे बढ़ते आ रहे हैं.
कुछ सामने हैं,
कुछ पीछे से घात लगाकर
हमले को तैयार हैं.
इन सबके बीच
छाई हुई है ख़ामोशी
ताकि लोग जग न जाएं
क़ातिलों के मन्सूबे
नाकाम न हो जाए.
उज्ज्वल भट्टाचार्या
Next Story


