हस्तक्षेप के एक पाठक का [email protected] मेल आईडी से पत्र आया है। पत्र बिना संपादन के प्रस्तुत है।
महोदय,
पिछले कई वर्षों से आपसे जुङा हूँ, और अब तक मैंने ये निष्कर्ष निकाला की आपकी सोच पूर्णतः भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध है । इसमें कोई दो राय नहीं है की कोई भी राजनीतिक पार्टी ईंमानदार नहि है लेकिन मैंने ये पाया की सॉरी राजनीतिक पार्टियां अगर डकैत हैं तो भा जा पा चोर है । डकैतों से चोर फिर भी ठीक हैँ, इस बात से कम से कम आप जरुर सहमत होंगे । मुस्लिम वोट की तुष्टिकरण के लिये सभी तथाकथित सेकूलर राजनितिक पार्टियां मुस्लिमों के तलवे चाट रही हैं ।
अक्षरधाम मन्दिर मे मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा निर्मम हत्याऐं की गईं क्या वहाँ दंगा हुआ ! गुजरात में सिलसिलेवार तरीके से मुस्लिम आतंकवादियों ने बम से हत्याएं की क्या दंगा हुआ । गुजरात की जनता सहन करती रही लेकिन जब गोधरा मे बोगियों को बाहर से बन्द करके पेट्रोल छिड़क कर निर्दोष गुजरातियों को जला कर मार डाला तो क्या आप ये उम्मीद करते कि वहाँ के लोग ख़ामोशी इख्तियार करलें, ये जनाक्रोश था जिसे सम्हालना किसी के बस की बात नहीं थी ।
हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा दंगा १९८४ का था और वो भी जनाक्रोश था जिसे शह दिया कॉन्ग्रेस ने । इस वर्ष मुजफ्फरनगर का दंगा सुनियोजित था अगर प्रशासन ने निष्पक्ष हो कर कार्यवाही की होती तो शायद दंगा न होता ये सिर्फ किसी के कहने से एक पक्षीय कार्यवाहीं से हुए । लेटेस्ट कानपुर में जो दंगा हुआ वो भी सुनियोजित था, जब सरकार को मालूम है की वहाँ से भगवन राम की यात्रा निकलेगी तो उस रास्ते को ठीक करते, पानी के भराव की वज़ह से अगर वो यात्रा ठीक रस्ते से निकल जाती तो क्या हो जाता लेकिन ये भी पूर्णतः नियोजित था वर्ना क्षेत्रीय मुस्लिम परिवारों द्वारा एक हो कर छत से यात्रा मे भगवान के प्रतीक बने निरीह इंसानो पर खौलता पानी
न डालते । आप स्वयं निर्णय लें किसकी गलती है । हम आपके माध्यम से तथाकथित सेकुलर सरकारों से मांग करते हैं कि राष्ट्रहित मे अब हिंन्दुस्तान मे एक संविधान की जरूरत है जो धर्म से ऊपर हो । सबसे बड़ा धर्म राष्ट्रधर्म होता है और दूसरा जनसँख्या पर सख़्ती से नियंत्रन किया जाय तभी वोट तुष्टिकरण की राजनीती खत्म होगी
और नए भारत का निर्माण होगा ।

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