हाँ, मैं हिन्दू हूँ और बीफ खाने वालों का सर्मथन भी करूंगा और बचाव भी...
हाँ, मैं हिन्दू हूँ और बीफ खाने वालों का सर्मथन भी करूंगा और बचाव भी...
Yes, I am a Hindu and I will support the beef eaters and also defend ...
विक्की कुमार
आश्चर्य हुआ न ! आँखे भी चौड़ी हो गई होंगी। दिमाग में उथल - पुथल मच गई होगी। आप सोच रहे होंगे यह हिन्दू लड़का यह क्या बोल गया। सुनकर गुस्सा भी आ रहा होगा। खून भी खौल ही रहा होगा आपका।
मैं जानता हूँ। किन्तु हौअ ...... दिमाग को ठंडा कीजिये। हो सके तो दो - तीन घूंट पानी भी पी लीजिये। कुछ पल के लिए खून को भी बोल ही दीजिये शांत रहने को। क्योंकि मैं बताता हूँ मैं एक हिन्दू होते हुए भी ऐसा क्यों कह रहा हूँ .......
देश में आये दिन मांस को लेकर कहीं न कहीं हिंसक घटनाएं होती रहती है। कहीं किसी को मांस के नाम पर मौत के आगोश में सुला दिया जा रहा है, तो कहीं किसी की चमड़ी उधेड़ ली जा रही है। थप्पड़, लात, घूँसे यें सब बातें तो आम हैं। और तो और देश के युवा जो सोशल साइटों पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, उनके समक्ष ऐसी फोटो और वीडियों पहुँचाई जा रही हैं, जिससे हिंसक घटनाएं होती रहती हैं।
गुजरात के ऊना की घटना और बिहार छपरा (सारण) की घटना शायद भूले भी नहीं होंगे कि जुनैद से लेकर झारखंड की घटना एक बार फिर आँखों के सामने है।
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पता नहीं और कितने अभी उनके एजेंडे में बाकी हैं। यह कैसा माहौल है ? यह कैसी भीड़ है? जिसका उद्देश्य मांस के एक छोटे से टुकड़े के नाम पर किसी की हत्या करना है। उन्हें यह कौन खुली छूट देता है कि तुम पता करो वो मांस क्या है और सजा भी तुम ही दे दो ?
सोचता हूँ और सोच कर सहम भी जाता हूँ। कभी - कभी तो डर भी लगता है, उस क्रूर भीड़ के बारे में सोचकर। पता नहीं कब मैं उनका शिकार हो जाऊँ। क्योंकि मैं हिन्दू हूँ और बचपन से गाय के लेख में एक लाइन लिखते - लिखते मेरे दिमाग में बैठ चुकी है कि गाय हमारी माता है। आपके नजर में भी होगी ही। मेरे नजर में भी है, किन्तु बीफ या खुले शब्दों में कहूँ तो गौ मांस खाने वाले का मैं समर्थन करूंगा। हां बस वो खाने वाली क्रिया एपीडा के नियम और शर्तों पर किया जा रहा हो।
क्या है एपीडा
एपीडा एक सरकारी संस्था है जो देश में मांस के आयात -निर्यात व उससे जुड़ी नियम की देखरेख करती है। मेरी इस बात से पता नहीं कितने मेरे हिन्दू भाइयों का खून खौल गया होगा, ख़ास कर उन गौ रक्षको का तो पक्का, जो आये दिन किसी न किसी की जान ले रहे हैं।
मैं जानता हूँ मेरी इस बात के बाद आप मुझे न जाने किन - किन शब्दों की उपाधि देने को उत्सुक भी हो गए होंगे। आप मुझसे तर्क- वितर्क करे उससे पहले कुछ जानकारियां आप सबों के बीच शेयर करना चाहूँगा।
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देश में मांस को लेकर तर्क-वितर्क करने से पहले जरा हम देश में शाकाहारी और मांसाहारी लोगों का आंकड़ा देख लें।
शाकाहारी और मांसाहारी लोगों का आंकड़ा : 70 फीसदी से ज्यादा लोग मांसाहारी
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस ) के जून में आये आकड़ों के मुताबिक इस मुल्क की लगभग एक तिहाई आबादी ही शाकाहारी है, यानी 70 फीसदी से ज्यादा लोग मांसाहारी हैं।
मांसाहार का यह अनुपात सभी जातियों और लिंगों में लगभग एक जैसा है। अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बीच शाकाहारी और मांसाहारी लोगों की तादाद में थोड़ा ही फर्क है। सामान्य समूह के करीब 69 फीसदी मांसाहारी है तो अनुसूचित जातियों में 77फीसदी और अनुसूचित जनजातियों में76 फीसदी है।
अब थोड़ा राज्यों की ओर भी नजर कर लें –
एसआरएस की रिपोर्ट के मुताबिक 8 राज्यों में रहने वाले 90 फीसदी से ज्यादा लोग मांसाहारी है। इनमें आंध्रप्रदेश (98.25), बिहार(92.45), झारखंड (96.75), केरल(97), ओड़िसा(97.35), तमिलनाडु(97.65), तेलंगाना(98.7), बंगाल(98.55), शामिल है। वहीं जम्मू-कश्मीर की 69 फीसदी आबादी ही मांसाहारी है। कर्नाटक व उत्तराखंड का आंकड़ा 70 फीसदी का है।
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शाकाहारी राज्यो में राजस्थान(74.9), हरियाणा(62.25), पंजाब(66.75) और गुजरात(60.95) प्रतिशत शामिल हैं।
महाराष्ट्र, दिल्ली, और उत्तर प्रदेश में शाकाहारी का प्रतिशत 35-45 के बीच रहता है।
यह आंकड़े यह भी बताते हैं कि महिलाएं (29.3)फीसदी के आंकड़े से आगे हैं जबकि पुरुष का आंकड़ा (28.4) फीसदी का है।
अर्थात् हमारे देश के 70 फीसदी से ज्यादा लोग किसी न किसी पशु का इस्तेमाल अपने भोजन के रूप में कर रहे हैं। लेकिन आये दिन देश में मांस को लेकर सबसे ज्यादा घटनाएं हो रही है तो वह है गौ मांस को लेकर।
http://www.censusindia.gov.in/vital_statistics/BASELINE%20TABLES08082016.pdf
देश के अलग- अलग राज्यों में एपीडा के नियम और शर्तों के अनुसार गौ मांस और उसे भोजन के रूप में ग्रहण करने की इजाजत अलग - अलग है।
जुनैद मेरा बेटा था वह उन सब का बेटा भी था जो वहां उपस्थित थे परंतु उन सबने उसे मरने दिया
आइये हम राज्यवार यें देखने की कोशिश करे कि मांस को लेकर देश के राज्यों में क्या गैर कानूनी है और क्या क़ानूनी सही ?
1.केरल – सब कुछ लीगल है। गाय-भैंस सब। काटना, खाना, बेचना सब लीगल।
2. पश्चिम बंगाल- सेम टू सेम। सब लीगल।
3. मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल, मिज़ोरम और सिकिक्म- सब लीगल। गाय, भैंस सब।
4. मणिपुर- गाय काटना बैन है। खाना, बेचना, रखना लीगल है। भैंस में सब लीगल है।
5. असम- स्लॉटर के लिए सर्टिफिकेट नहीं है तो गाय नहीं काट सकते। बाक़ी खा सकते हैं, बेच सकते हैं। भैंस के लिए सब ओके है।
6. आंध्र प्रदेश + तेलंगाना- गाय, बछड़ा प्रतिबंधित है। सांढ़ और बैल को सर्टिफिकेट मिलने के बाद काटा जा सकता है, बशर्ते वो अब प्रजनन, खेती और हल चलाने के काबिल न हो। भैंस- ओके।
7. बिहार- गाय, बछड़ा प्रतिबंधित है। 15 साल से ज़्यादा बड़े सांढ़ और बैल का स्लॉटर लीगल है। खाना, रखना वगैरह लीगल है। भैंस में तो सब कुछ लीगल है।
8. झारखंड- गाय, बैल वगैरह काटना, मांस रखना, खाना सब प्रतिबंधित है। भैंस- ओके।
9. गुजरात- गाय, बछड़ा, सांढ़, बैल पर प्रतिबंध है। काटना, खाना और ले जाना प्रतिबंधित है। भैंस पर कोई प्रतिबंध नहीं यानी ओके।
10. मध्य प्रदेश- गाय, बछड़ा, सांढ़ वगैरह सब प्रतिबंधित है। भैंस ओके है।
11. छत्तीसगढ़- गाय, बछड़ा, बैल, सांढ़ प्रतिबंधित। हर तरह से प्रतिबंधि। भैंस- ओके।
12. उत्तर प्रदेश- गाय, बछड़े, सांढ़, बैल का स्लॉटर प्रतिबंधित। इनका मांस खाना भी प्रतिबंधित। विदेशियों को खाने की अनुमति है। सील पैक्ड डब्बे में मांस लाया जा सकता है, लेकिन सिर्फ़ विदेशियों के लिए उसे पकाया जा सकता है। भैंस में सब ओके।
13. दिल्ली- गाय, बछड़ा, बैल, सांढ़ प्रतिबंधित है। पूरी तरह प्रतिबंधित। किसी दूसरे राज्य से भी मांस लाकर खाना मना है। भैंस- ओके।
14. हरियाणा- गाय पर सब बैन है। खाने पर मैं श्योर नहीं हूं। भैंस- ओके है।
15. चंडीगढ़- यहां सब प्रतिबंधित है। गाय, भैंस सब। खाना, काटना, बेचना सब।
16. हिमाचल प्रदेश- सिर्फ़ रिसर्च के लिए काटने की अनुमति है या फिर अगर जानवर बीमार हो। बाक़ी सब ग़ैर-क़ानूनी है।
17. राजस्थान- गाय, बैल, बछड़ा, सांढ़ पर पूरी तरह प्रतिबंध। भैंस में सब ओके।
18. पंजाब- गाय का मांस बाहर से मंगाकर खा सकते हैं। पंजाब में खाने के लिए काट नहीं सकते। भैंस के लिए वही नियम है। भैंसे को निर्यात के लिए काट सकते हैं। इसलिए यहां नियम पेंचीदा है। अगर आप खा रहे हैं तो ये बता सकते हैं कि आपने बाहरी राज्यों से मंगवाया है।
19. ओडिशा- सिर्फ़ संक्रमण वाली बीमारी से ग्रसित गाय काट सकते हैं। बाक़ी नहीं। बूढ़े बैल, सांढ़ को सर्टिफिकेट के साथ काटा जा सकता है। भैंस के लिए कोई नियम नहीं। सब ओके।
20. महाराष्ट्र- 2015 के बाद गाय, बैल, बछड़ा, सांढ़ वगैरह काटनाक, खाना, मांस रखना ग़ैर-क़ानूनी है। पहले ये नियम सिर्फ़ गाय पर लागू था। भैंस- सब लीगल।
21. जम्मू-कश्मीर- गाय, बैल, बछड़ा, सांढ़ को काटना,खाना, मांस रखना सब ग़ैर-क़ानूनी है। हाल ही में ये नियम बना। भैंस- ओके।
22. कर्नाटक- गाय अगर उम्रदराज़ या फिर बीमार है तो काट सकते हैं। खाना, मांस रखना, सब लीगल है। भैंस में सब लीगल।
23. तमिलनाडु- गाय, बछड़े पर प्रतिबंध। बेकार और बूढ़ी गायों और बछड़ों का स्लॉटर ओके। खाना, मांस रखना ओके। भैंस में सब ओके।
24. गोवा- गाय मारना बैन। खाना- ओके। भैंस- ओके।। आपको यह जानकार आश्चर्य हुआ न ! शायद पहले से पता न हो। पाता भी कैसे चले कोई बताना नहीं चाहता क्योंकि सभी की नजर में यह बात बैठ गयी तो फिर गौ मांस के नाम पर कुछ गैर कानूनी लोग उस भीड़ को एकत्रित कैसे करेंगे जो किसी की भी जान ले लेती है।
(ये क्रिया एपीडा के नियम व शर्त के अनुसार ही संभव है )
आंकड़े सभार - http://dakhalkiduniya.blogspot.in/2016/07/blog-post.html?m=1
खैर अब थोड़ा बात कर लिया जाये व्यापार पर भी.....
भारत में मांस कारोबार- भारत मांस के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत में सबसे ज्यादा मांस का निर्यात बीफ का होता है जिसका संबंध भैसों से है। भारत में गाय के मांस के निर्यात पर पूर्ण पाबंदी है। भारत में मांस के कारोबार एपीडा के बनाये गए नियम-कानून से तय होती है। एपीडा पशुओं के बूचड़खाने से लेकर उपभोक्ताओं के प्लेट तक पहुंचने तक कई नियम बनाए हैं।
बीफ के निर्यात में भारत पहला, ब्राजील दूसरा और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर है। भारत लगभग 65 देशों में बीफ की सप्लाई करता है। वियतनाम लगभग 40 फीसदी आयातक के साथ भारत का सबसे बड़ा अयताक है। भारत 2009 में 917 मीट्रिक टन बीफ का निर्यात करता था तो 2011 में 1,268, 2012 में 1,411 और 2013 में 2,765 मीट्रिक टन बीफ का निर्यात कर चुका है। वैश्विक स्तर पर निर्यातक के मामलों में भारत की हिस्सेदारी 2004 में 7 फीसदी, 2010 में 11 फीसदी, और 2014 में 20 फीसदी तक पहुंच गयी है। हालांकि देश के कई संगठन इस कारोबार का विरोध कर रहे है किंतु देश के निर्यातक के मामलों में यह कारोबार दूसरे स्थान पर आज विरजमान हो चुका है।
अब आप खुद सोचे एक तरफ एपीडा के नियम और शर्त तो दूसरी तरफ गौरक्षा के नाम पर हो रही हत्या। जिस दिन आप इन दोनों को समझ जाएंगे शायद आप अपने आँखों के सामने किसी भी इंसान की,मांस के नाम पर हो रही हत्या की निंदा करेंगे।
मैं देश में मांस और ख़ास कर गौ मांस को लेकर हो रही हत्या से हतप्रभ हूँ। ख़ास कर उस भीड़ से जो उस हत्या को चुपचाप देखकर उसका समर्थन ही करती नजर आती है। देश में बन रही इस भीड़ को रोकना होगा उनसे बाते करनी होगी उन्हें समझाना होगा और उन्हें उस भीड़ का हिस्सा बनने से रोकना होगा। उनकी निजी राजनीतिक लड़ाई को साम्प्रदायिकता का मुखौटा बनने नहीं देना होगा।
मैं तो कोशिश करूंगा आपका पता नहीं !
वैसे अब जो लोग मेरे बातों से असहमत है वो मुझे अलग - अलग शब्दों से नवाज सकते हैं।
(विक्की पत्रकारिता छात्र)


