हमारा मीडिया हार्दिक पटेल को केजरीवाल की राह पर ले जाने की पूरी कोशिश में है। आन्दोलन को हवा देने की भरपूर कोशिश हो रही है।
पाटीदारो को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह मुद्दा गौण होकर ठण्डे बस्ते में चला जाएगा, कुछ लोग कोर्ट कचहरी में जद्दोजहद करते रहेंगे और हार्दिक पटेल गुजरात में नई ताकत बनकर उभरेंगे, जाति के आसरे वैकल्पिक व नई राजनीति करने उतरेंगे और राजनीति तो राजनीति होती है जिसमें नया, पुराना कुछ नहीं होता।
क्या इस प्रकार के मुद्दों पर हमारा मीडिया खासतौर से टेलीविजन व्यक्तिवादी नहीं हो जाता, जैसे लोकपाल का हश्र हुआ और लोकपाल को जोकपाल बताने वाले वैकल्पिक राजनीति कर रहे हैं विकास के लिए, लोकपाल के लिए नहीं। आरक्षण को लेकर कहीं न कहीं तो छोटे बड़े स्तर पर इस देश में आंदोलन चलते रहते हैं, तो इसको इतना तव्वजो देकर मंगलवार जैसी स्थिति क्यों पैदा की जा रही है।
...और रही बात विकास की, तो हिंदुस्तान में किसी भी जाति का समग्र विकास नहीं हुआ, लेकिन पाटीदारों की स्थिति उन्नत से भी ज्यादा है और यह आरक्षण को खत्म करने के बहाने नामुमकिन चीज मांगकर अपनी ताजपोशी की फिराक में हैं, इसके पीछे की ताकतों की भी जांच होनी चाहिए।
जहां तक इसका महत्वपूर्ण पहलू मुझे समझ आ रहा है, वह ये हो सकता है कि केंद्र सरकार जंग के जरिए केजरीवाल को तंग कर रही है, जैसे कि आरोप आप की तरफ से लगते रहे हैं तो हो सकता है केजरीवाल ने उसका काउन्टर गुजरात में भेजा हो, भाजपा को परेशान व कमजोर के लिए।
रवि शर्मा

रवि शर्मा, स्वतंत्र टिप्पणीकार, जोधपुर