हाशिमपुरा की पुनः निष्पक्ष जांच की जरूरत- विभूति नारायण राय
हाशिमपुरा की पुनः निष्पक्ष जांच की जरूरत- विभूति नारायण राय
राज्य बनाम हाशिये के लोग विषय पर सेमिनार संपन्न
लखनऊ। हाशिमपुरा जननसंहार के वक्त गाजियाबाद के एसपी रहे विभूति नारायण राय का कहना है कि हाशिमपुरा की घटना को किसी जाति या धर्म के चश्में से देखना अनुचित होगा। यह घटना मानवीयता को शर्मशार करने वाली थी। उस समय मेरठ में उठे दंगों में पुलिस का व्यवहार को न्यायपरक नहीं कहा जा सकता है। पुलिस के संरक्षण में कत्लेआम और नरसंहार का होना भारतीय लोकतंत्र के ऊपर बदनुमा दाग है, जिन्हें पुनः निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्यवाही के आधार पर कुछ हद तक धोया जा सकता है।
श्री राय आज यहां भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) कार्यालय परिसर स्थित सफदर मंच पर ‘राज्य बनाम हाशिये के लोग‘ हाशिमपुरा से संदर्भित विषय पर आयोजित किए गए सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस का उस समय कार्य दंगों से लोगों में हिफाजत का भाव पैदा करने होना चाहिये था, जिससे इस तरीके के जघन्य घटनाओं की पुनरावृत्ति न होती, परंतु दुर्भाग्य से हाशिमपुरा नरसंहार जैसी घटना हो गई।
उन्होंने अदालत से आये फैसले पर अपनी बात कहते हुए कहा कि यह मामला सही तरीके से अदालत में पेश नहीं हो पाया। इसके लिए जरूरी हो गया है कि मामले की पुनः किसी निष्पक्ष एजेंसी से इमानदार जांच करायी जाए तथा उस दौर के प्रत्यक्षदर्शियों व अन्य तथ्यों को एकत्र करके फिर से अदालत में जाने की जरूरत है। यह किसी जाति, धर्म व मजहब के प्रति घटना नहीं कही जा सकती है, बल्कि इंसानियत के खिलाफ एक षडयंत्र जैसा प्रतीत होता है।
इस सेमिनार का संचालन इप्टा के महासचिव राकेश व अध्यक्षता सीपीआई (एम) नेता छोटेलाल पाल ने की। इस सेमिनार का आयोजन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।


