हाशिमपुरा नरसंहार - ऊपरी न्यायालय में मजबूत पैरवी करे सरकार
हाशिमपुरा नरसंहार - ऊपरी न्यायालय में मजबूत पैरवी करे सरकार
लचर पैरवी के कारण बचे हाशिमपुरा नरसंहार के आरोपी -आइपीएफ
लखनऊ, 22 मार्च 2015, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी ने कहा है कि हाशिमपुरा जनसंहार के सभी आरोपी पीएसी जवानों को दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट द्वारा बरी करने का फैसला दुखद है, देश भर के इंसाफपसंद नागरिक और अल्पसंख्यक समुदाय इस फैसले से स्तब्ध हैं।
श्री दारापुरी ने कहा कि कांग्रेस, जिसके राज में इस जनसंहार को अंजाम दिया गया था, समेत सपा और बसपा सरकारों द्वारा की गयी लचर पैरवी के कारण ही इतने बड़े जनसंहार के आरोपी अदालत से बरी हो गए। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने के तत्कालीन कांग्रेस सरकार के निर्णय की पृष्ठभूमि में 22 मई 1987 को यह जनसंहार हुआ था। जिसमें मेरठ के हाशिमपुरा मुहल्ले के अल्पसंख्यक समुदाय के 50 लोगों को पीएसी ने मस्जिद से उठा लिया था और जिनमें से 42 की गोली मारकर हत्या कर उनके शव नहर में फेंक दिए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि इस बर्बर एवं जघन्य काण्ड़ को उस समय की कांग्रेसी सरकार के इशारे पर अंजाम दिया गया था इसी वजह से इस काण्ड के मास्टरमाइण्ड पीएसी के तत्कालीन कमांडेण्ट का नाम एफआईआर से बाहर कर दिया गया था।
श्री दारापुरी ने कहा कि यह फैसला बिहार के बाथे, बथानी टोला और शंकर बिगहा काण्ड के बाद दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों एवं कमजोर वर्गो के प्रति भारत की विधायिका एवं न्यायप्रणाली की उपेक्षा एवं संवेदनहीनता का जीता-जागता नमूना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार से मांग की कि वह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ऊपरी न्यायालयों में मजबूती से पैरवी करे और साम्प्रदायिक मानसिकता एवं कारनामों के लिए कुख्यात पीएसी जैसे बल को भंग कर इसमें समाज के सभी तबकों की हिस्सेदारी की गारण्टी करते हुए इसका पुनर्गठन किया जाए ।


