मोदीजी 118 करोड़ निरीह जनता के खिलाफ युद्ध बंद करो, वास्तविक काले धन वालों पर ठोस कार्यवाही करो
वास्तविक काले धन वालों पर ठोस कार्यवाही करो, आम जनता को राहत दो- भाकपा
लखनऊ 16 नवंबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की है कि वास्तविक काले धन वालों पर ठोस कार्यवाही की जाए और आम जनता को राहत दी जाए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय सचिव मंडल के वक्तव्य के परिप्रेक्ष्य में भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने निम्नलिखित बयान जारी किया है—
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भ्रष्टाचार, काले धन और नकली मुद्रा के खिलाफ संघर्ष के अपने संकल्प को दोहराते हुये महसूस करती है कि श्री मोदी सरकार द्वारा अचानक बड़े नोटों को प्रचलन से बाहर कर देने के आदेश ने आम जनता खास कर खोमचे वालों, रोज कमा कर खाने वालों, वेतनभोगियों, खुदरा कारोबारियों, छोटे किसानों, खेत मजदूरों तथा दस्तकारों के सामने बड़ी कठिनाइयां खड़ी कर दी हैं। सरकार को विमुद्रीकरण की इस कार्यवाही पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिये।
राजनैतिक उद्देश्यों से बिना तैयारी के की गयी इस कार्यवाही के बाद से आम लोगों की जेबें खाली हैं।
अधिकतर को एटीम अथवा बैंकों से धन मिल नहीं पा रहा है अथवा बहुत कम मिल पा रहा है।
अतएव अर्थाभाव में बीमार दम तोड़ रहे हैं, तमाम लोग भूखों मर रहे हैं, लंबे समय तक लाइनों में खड़े लोगों की दिल के दौरे पड़ने से मौतें हो रही हैं, अनेक आत्महत्या कर चुके हैं और असहाय लोग आपस में लड़ रहे हैं, पुलिस से लड़ रहे हैं, बैंकों पर तोड़ फोड़ कर रहे हैं अथवा बैंककर्मियों पर गुस्सा उतार रहे हैं।
काम के भारी बोझ के चलते बैंक कर्मी बीमार पड़ रहे हैं और कई की मौत तक हो चुकी है।
शादी विवाह वाले परिवारों को भारी कठिनाइयां आ रही हैं।

पर लोगों की समस्याओं का निदान करने के बजाय प्रधानमंत्री जनता को इमोशनली ब्लैकमैल कर रहे हैं।
मुद्रा के अभाव में तमाम औद्योगिक व्यापारिक और कृषि संबंधी गतिविधियां ठप पड़ी हैं। उद्योगों में उत्पादन ठप है। निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र औंधे मुंह पड़ा है, ट्रान्सपोर्ट और परिवहन पंगु हो चुका है और पर्यटन उद्योग जाम की स्थिति में है।
किसान बुआई के लिये खाद बीज नहीं खरीद पा रहे और उनके अनाज फल सब्जियां बिक नहीं पा रहे। मनरेगा तक ठप पड़ी हैं। शहरी मजदूर पलायन कर रहे हैं और तमाम मजदूर उधार पर काम करने को मजबूर हैं। विकास और अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
दो हजार के नोट के कारण भारी कठिनाइयां खड़ी हो रही हैं, क्योंकि इसको छुट्टा करने को छोटे नोट उपलब्ध नहीं है।

अतएव 50, 100, 1000, के नोटों को ज्यादा प्रचलन में लाने की जरूरत है।
दो हजार के नोट से तो काले धन को संरक्षित करने में और अधिक सुविधा होगी। जिस तरह का यह नोट छपा है उसका डुप्लीकेट भी आसानी से छापा जा सकता है। अतएव दो हजार के नोट को प्रचलन से वापस लेना चाहिये।
यदि सरकार को कालेधन की समानांतर अर्थव्यवस्था को खत्म करने को वाकई संजीदा प्रयास करना था तो उसे सबसे पहले विदेशों में जमा 80 हजार करोड़ के उस धन को वापस लाना था, जिसे लाने का ढिंढोरा भाजपा लोकसभा के चुनाव अभियान में पीटती रही।
विक्की लीक्स द्वारा विदेशों में जमा धन और पनामा पेपर्स लीक के अनुसार विदेशों में निवेशकर्ताओं के खुलासे के आधार पर सरकार को ठोस कार्यवाही करनी चाहिये थी। नकली नोटों के करोबारी, हवाला वालों तथा काले धन के 7 करोड़ सरगनाओं पर कार्यवाही करने के बजाय सरकार ने 118 करोड़ निरीह जनता के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।

इसके अलावा सरकार को उन बड़े धन्ना सेठों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिये जिन्होने बैंकों से लिये कर्ज को हड़प लिया और बैंकों ने उसे बट्टे खाते में डाल दिया।
सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दी गयी जानकारी के अनुसार 87 व्यक्तियों जिन पर 500 करोड़ से अधिक बकाया है पर कुल 85 हजार करोड़ बकाया है। यदि इस सूची में 100 करोड़ तक के बकायेदारों को भी शामिल कर लिया जाये तो यह बकाया राशि एक लाख करोड़ से अधिक बैठेगी। इसके अलावा 100 करोड़ से कम वाले भी बहुत सारे हैं। सरकार को इन गैर उत्पादित परिसंपत्तियों ( एनपीए ) की वसूली के लिये शीघ्र ठोस कदम उठाने चाहिये तथा इन कर्जदारों की संपत्तियों को जब्त करना चाहिये।
इस तरह की रिपोर्ट्स भी मिल रही हैं कि बहुत सारे लोगों, राजनैतिक दलों के नेताओं, भाजपा समर्थक उद्योगपतियों और भाजपा ने करोड़ों करोड़ रुपये पिछले महीनों में बैंकों में डाल दिया और काले धन को सुरक्षित व्यवसायों में निवेशित कर दिया, क्योंकि उन्हें विमुद्रीकरण की इस कार्यवाही के बारे में पता था। सभी पूंजीवादी दलों की धड़ल्ले से चल रही गतिविधियां इसका जीता जागता प्रमाण हैं। सबसे आगे भाजपा है जिसकी 75 रथयात्रायें उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड में चल रही हैं और मोदी – शाह की बेहद खर्चीली रैलियां आयोजित की जा रही हैं। बैंकों को ऐसे जमाकर्ताओं की सूची जारी करनी चाहिये।
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने पार्टी की समस्त शाखाओं एवं कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे काले धन से संबंधित मांगों, विदेशों में जमा धन और निवेशित धन तथा एनपीए की वसूली तथा दो हजार के नोट को वापस लेने व 50, 100, 500 और एक हजार के नोट को ज्यादा से ज्यादा प्रचलन में लाने की मांग को लेकर केंद्रीय सरकार के कार्यालयों, खासकर आयकर कार्यालयों और बैंकों के समक्ष मार्च, धरने और प्रदर्शन करें। जनता और बैंक कर्मियों की राहत के लिये ठोस कदम उठाने की मांग भी केंद्र सरकार से की जानी चाहिये।
भाकपा कार्यकर्ताओं को कठिनाइयां झेल रहे लोगों की भी हर संभव मदद आगे बढ कर करनी चाहिए।