भोपाल। बहुचर्चित अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है।

पुरस्कारों की घोषणा मंगलवार 30 दिसम्बर 2014 को, साहित्य सदन, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार, भोपाल में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में की गई। पुरस्कारों की घोषणा डा. हरिसिंह गौर वि. वि. सागर के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक आनन्द त्रिपाठी एवं इलाहाबाद की कवयित्री श्रामती विजयलक्ष्मी विभा ने संयुक्त रूप से की। इक्कीस सौ रुपये राशि के दिव्य पुरस्कार, पंकज परिमल (साहिबाबाद) को उनके खंडकाव्य “उत्तम पुरुष का गीत” डा. शशिवर्धन शर्मा शैलेश, (नागपुर) को उनके उपन्यास “वक्त की आँधयाँ,” वनाफर चन्द्र (भोपाल) को उनके कहानी संग्रह “उसकी डायरी” डा. राकेश कुमार सिंह (आगरा) को उनके निबन्ध संग्रह “धनिया की कामधेनु” एवं रवीन्द्र बडगैंया (बिलासपुर) को उनके व्यंग संग्रह “तो अंग्रेज क्या बुरे थे”, के लिए प्रदान किये जायेंगे। इसके अलावा राघवेन्द्र तिवारी (भोपाल ) को उनके काव्य संग्रह “स्थापित होता है शब्द हर बार” , हातिम जावेद मेहसी (चंपारण) को उनके गजल संग्रह, “वक्त की हथेली में“, प्रेमचंद सहजवाला (दिल्ली) को उनके उपन्यास “नौकरीनामा बुद्धू का”, श्रीमती रंजना फतेपुरकर (इंदौर) को उनके लघु कथा संग्रह “बूंदों का उपहार” श्री कृष्ण नागपाल (नागपुर ) को उनके निबन्ध संग्रह “अजगर और मेमने” श्री सदाशिव कौतुक (इंदौर) को उनके व्यंग संग्रह ”भगवान दिल्ली में’ के लिये तथा “शब्द प्रवाह“ पत्रिका को श्रेष्ठ संपादन हेतु संदीप सृजन (उज्जैन) को अम्बिका प्रसाद दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जायेंगे।

दिव्य पुरस्कारों के संयोजक जगदीश किंजल्क ने बताया कि इन पुरस्कारों हेतु देश के कोने-कोने से कुल 147 पुस्तकें प्राप्त हुई थीं। सत्रहवें दिव्य पुरस्कारों के विद्वान निर्णायक हैं – प्रो. आनन्द त्रिपाठी, माता चरण मिश्र, श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा, मयंक श्रीवास्तव, राजेन्द्र नागदेव, प्रियदर्शी खैरा, संतोष खरे, प्रो.रामदेव भारद्वाज, प्रभुदयाल मिश्र, कुमार सुरेश, एवं जगदीश किंजल्क।

साहित्य सदन की व्यवस्थापक श्रीमती राजो किंजल्क ने बताया कि ये पुरस्कार शीघ्र ही विद्वानों को उपलब्ध कराये जायेंगे। अठारहवें दिव्य पुरस्कारों हेतु भी पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं।

अठारहवें अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं। उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग एवं निबन्ध विधाओं पर प्रत्येक के लिये इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किया जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ, लेखक के दो छाया चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपये प्रवेश शुल्क भेजना होगा। हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 1 जनवरी 2013 से लेकर 31दिसम्बर 2014 के मध्य होना चाहिये। राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठापूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य-प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जायेगा। अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777, दूरभाष-0755-2494777 एवं ईमेल:[email protected] पर संपर्क किया जा सकता है। पुस्तकें भेजने का पता है-श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन, 145-ए, सांईनाथ नगर सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल-462042। पुस्तकें प्राप्ति की अंतिम तिथि है 30 अक्टूबर 2015। प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें।