300 झोपड़ियां जलकर राख
300 झोपड़ियां जलकर राख
लखीमपुर खीरी। शुक्रवार दिनांक 6 जून 2014 को उ0प्र0 के जनपद लखीमपुर खीरी, तहसील मौहम्मदी की ग्राम पंचायत सिमराजानी पुर के अन्तर्गत आने वाले अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन व तराई एवं थारु आदिवासी महिला मजदूर किसान मंच के बैनर तले लम्बे समय से वनाधिकारों के लिए लड़ रहे गाॅव दिलावर नगर में दिन के 12.00 बजे के आसपास एक झोंपड़ी में आग लग गयी, जो कि देखते ही देखते पूरे गाॅव के लगभग 300 फूस के बने घरों में फैल गई और सभी घर जलकर राख हो गए। इसमें गाॅव के एक निवासी थारु आदिवासी रामसिंह की पीठ बुरी तरह से झुलस गई, जिन्हें मौहम्मदी स्थित सरकारी अस्पताल में लाया गया, जहाँ से उन्हें जिला अस्पताल में रेफर किया गया जहां उनका ईलाज चल रहा है। गाॅव के तमाम लोगों के पास तन पर पहने हुए कपड़ों के सिवा कुछ भी नहीं बचा है। देर शाम तमाम तरहा के स्थानीय नेताओं पर दबाव बनाने के बाद उपजिलाधिकारी मौहम्मदी, सीओ मौहम्मदी व फायर ब्रिगेड वहां पर पहुंची तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। गाॅव के निवासी रमाशंकर के अनुसार प्रशासन इस मामले में तभी सक्रिय हुआ, जब यहां सपा से लोकसभा प्रत्याशी श्री आनंद भदौरिया द्वारा तुरंत कार्रवाई के लिए अधिकारियों को फोन पर सख्त हिदायत दी। रमाशंकर व गाॅव के लोगोें के अनुसार इस घटना को निश्चित रूप से वनविभाग द्वारा अंजाम दिया गया है।
अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के रजनीश ने बताया कि दिलावर नगर के लोग जिनमें दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़े व आदिवासी समुदायों के लोग करीब 300 से अधिक परिवार की संख्या में बसे हुए हैं व ये गाॅव 1990 के दशक की शुरुआत में पीलीभीत के गुनहान क्षेत्र के लोगों को शारदा नदी कटान की समस्या से प्रभावित होने के कारण जिला प्रशासन पीलीभीत व लखीमपुर खीरी द्वारा यहां वनविभाग के खातों में दर्ज गाटा नं0 34 की भूमि पर बसाया गया था। तभी से वे वनविभाग की आॅख की किरकिरी बने हुए थे और वनविभाग द्वारा आज भी उन पर मुकदमें लाद कर उजाड़ने की कोशिशें जारी हैं। 10 जून 2005 को इसी तरहा से वनविभाग द्वारा स्थानीय प्रशासन, पुलिस व आस-पास के गाॅवों के दबंग समुदायों की मदद से पूरे गाॅव को घेर कर जलाकर राख कर दिया गया था। जिसमें लोगों को बुरी तरहा से मारा पीटा गया व महिलाओं के साथ खुलकर दुव्र्यवहार किया गया। तभी से ये गाॅव अपनी खोई हुई ज़मीन को पाने के लिए संघर्षरत है व सन् 2006 में वनाधिकार कानून-2006 के तहत अपनी छिनी हुई ज़मीन को वापिस पाने के लिए लड़ रहा है। पंक्तियां लिखे जाने तक गाॅव के लोगों को स्थानीय सपा जनप्रतिनिधियों द्वारा नाकाफी तिरपाल केवल नीचे बिछाने के लिए उपलब्ध कराई गई है व खाना अभी स्थानीय प्रशासन द्वारा तैयार किया जा रहा है।


