कोयला कर्मचारियों की हड़ताल शुरू, देश के 22 बड़े बिजली उत्पादन गृहों में मात्र 03 दिन का कोयला शेष
बिजली इंजीनियरों ने हड़ताल का समर्थन किया, बिजली उत्पादन प्रभावित होगा
नई दिल्ली/ लखनऊ। कोयला उद्योग में विनिवेश व निजीकरण आदि के विरोध में पांच लाख श्रमिक, पांच दिवसीय हड़ताल पर हैं। पांच दिनों की हड़ताल से कोल इंडिया को भारी नुकसान होने की आशंका है। देश भर में बिजली इंजीनियरों ने हड़ताल का समर्थन किया है। हड़ताल से बिजली उत्पादन प्रभावित होगा।
कोल इण्डिया लि0 के 3.5 लाख से अधिक कर्मचारियों ने आज सुबह निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में पांच दिवसीय हड़ताल प्रारम्भ कर दी। हड़ताल को ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन एवं उ0प्र0 राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ ने नैतिक समर्थन दिया है। बिजली इंजीनियरों के संगठनों का कहना है कि कोयला हड़ताल से सबसे अधिक प्रभाव बिजली उत्पादन पर पड़ेगा।
ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे एवं उ0प्र0 विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव डी0सी0 दीक्षित ने बताया कि चूंकि कोयला कर्मचारियों की हड़ताल कोल इण्डिया लि0 के विनिवेश एवं निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में है अतः देश भर के बिजली इंजीनियरों ने कोयला कर्मचारियों की हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोयला ब्लॉक आवंटन को असंवैधानिक करार दिये जाने के बाद इन कोयला ब्लॉकों को कोल इण्डिया लि0 को देने के बजाय केन्द्र सरकार नीलामी के जरिये इसे निजी घरानों को सौंप रही है और अध्यादेश के तहत निजी घरानों को इस कोयले को वाणिज्यिक उपयोग के लिए बेचने की छूट दी जा रही है जो निजीकरण की दिशा में उठाया गया एक स्पष्ट कदम है। कोयला कर्मचारियों की मांग है कि असंवैधानिक करार दिये गये सभी कोयला ब्लॉकों को कोल इण्डिया लि0 को हस्तांतरित किया जाये और निजीकरण हेतु जारी अध्यादेश वापस लिया जाये।
अभियन्ता पदाधिकारियों ने बताया कि कोयला हड़ताल शुरू होने के समय देश के 22 बड़े बिजली उत्पादन गृहों में मात्र 03 दिन का कोयला शेष है जबकि अन्य 40 बड़े बिजली उत्पादन गृहों में मात्र 04 दिन का कोयला शेष है ऐसे में कोयला हड़ताल से सबसे अधिक बिजली उत्पादन पर प्रभाव पड़ने वाला है। उ0प्र0 के 1140 मे0वा0 क्षमता के पारीछा विद्युत गृह में मात्र 01 दिन का कोयला बचा है और अन्य 18 रेक रास्ते में हैं। इसे देखते हुए परीछा बिजली घर का विद्युत उत्पादन 03 दिन बाद प्रभावित हो सकता है। पारीछा में प्रतिदिन 17 हजार मी0टन कोयले की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार 660 मे0वा0 क्षमता के हरदुआगंज विद्युत गृह में मात्र 02 दिन का कोयला बचा है और अन्य दो दिनों के लिए कोयला रास्ते में है इस तरह हरदुआगंज में भी हड़ताल के दौरान बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कोयला हड़ताल से प्रतिदिन लगभग 15 लाख मी0टन कोयले की आपूर्ति प्रभावित होगी जिससे लगभग 150 करोड़ रूपये प्रतिदिन की क्षति सम्भावित है। पांच दिनों की हड़ताल में लगभग 800 करोड़ रूपये का कोयला उत्पादन तो प्रभावित होगा ही साथ ही देश के कई बिजली घरों में विद्युत उत्पादन ठप्प भी हो सकता है। इनमें एन0टी0पी0सी0 व उ0प्र0 के बिजली घर भी शामिल हैं।
अभियन्ता पदाधिकारियों ने केन्द्र सरकार से कोयला अध्यादेश वापस लेने की मांग की।