500 करोड़ खर्च करने वाले का बाल बांका नहीं, सफेद धन वाला कतार में मारा गया
500 करोड़ खर्च करने वाले का बाल बांका नहीं, सफेद धन वाला कतार में मारा गया
500 करोड़ खर्च करने वाले का बाल बांका नहीं हुआ और सफेद धन रखने वाला कतार में मारा गया
महेंद्र मिश्र
ब्लैक मनी के समुद्र से घड़ियाल तो बच निकले। अब सरकार झींगों और छोटी मछलियों को निशाना बना रही है।
500 करोड़ रुपये शादी में खर्च करने वाले रेड्डी बंधुओं के यहां बीजेपी नेता मेहमानवाजी कर रहे हैं। और ढाई लाख बैंकों में जमा करने वालों को इनकम टैक्स नोटिस भेज रहा है।
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री के 92 लाख रुपये पकड़े गए। इसको पूरी दुनिया ने देखा। क्या उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई? उन्हें मंत्रिमंडल से निकाला गया? या फिर कोई नोटिस भेजी गई?
यूपी के गाजियाबाद में बीजेपी नेता के साथ तीन करोड़ रुपये पकड़े गए। जिसमें खुद उसके हेडक्वार्टर के लोग शामिल हैं। क्या किसी की गिरफ्तारी हुई? तब किसके लिए हो रही है ये पूरी कवायद?
देश में मौतों की संख्या 60 से ऊपर हो गई है। कहीं पूर्व सैनिक मरे तो कहीं बेटी की शादी के लिए कतार में खड़ा बाप। तो कहीं खुद दुल्हनों को लाइन में खड़े होते पाया गया।
सैंकड़ों शादियां तो रद्द करनी पड़ी।
500 करोड़ खर्च करने वाले का बाल बांका नहीं हुआ और सफेद धन रखने वाला कतार में मारा गया।
आखिरकार फिर किसके लिए पूरा अभियान चलाया गया?
चोटी के तमाम अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कालेधन में लिक्विड यानी नगदी का हिस्सा महज 6 फीसदी है। बाकी कालाधन कई प्रकारों और वस्तुओं में है। इस हिस्से का भी बड़ा भाग चलायमान है। वो किसी बेड और गद्दे के नीचे नहीं है। चंद ही लोग ऐसे होंगे जिन्होंने इस तरह से रखा होगा। उन्हें या तो उसके निवेश का विकल्प नहीं मिला होगा। या फिर उनके अनाड़ीपन के चलते ऐसा हुआ होगा। तब इतने छोटे हिस्से के लिए इतने बड़ी कवायद की तार्किकता समझ से परे है।
सबसे ज्यादा कालाधन 50-100 करोड़ से ऊपर की पूंजी वाले तबके के पास है।
क्या इनमें से किसी को कोई परेशान होते देखा। बल्कि उल्टे अडानी से लेकर अंबानी तक सारे लोग इसका स्वागत कर रहे हैं। फिर यह काला धन के खिलाफ कैसी सर्जिकल स्ट्राइक है जिसमें उसको रखने वाले सबसे ज्यादा खुश हैं?
दरअसल यही बात समझने की है।
इस पहल से बड़े कारपोरेट को दीर्घकालीन और सरकार को तात्कालिक फायदा हुआ है। इसमें कारपोरेट ने दोहरा लाभ हासिल किया है। एकतरफ उसका कालेधन को कोई नुकसान नहीं हुआ। दूसरी तरफ बैंकों से कर्जे मिलने का फिर से रास्ता खुल जाएगा। जो बैंकों में लिक्विड क्रंच के चलते नहीं हो पा रहा था।
इस पूरे अभियान का मुख्य मकसद भी यही था।
दरअसल सरकारी बैंक कैश की कमी से जूझ रहे थे। किसी को याद हो तो उस संकट से बैंकों को उबारने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली बार-बार बयान दे रहे थे। इसके तहत एक बार सरकार ने 27 हजार करोड़ रुपये बैंकों को दिए भी थे। लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। उन्होंने और सहायता देने की बात की थी। लेकिन फिर भी मामला बनता नहीं दिख रहा था।
ऐसे में सरकार ने एक ऐसी पहल की है जिसमें अरबों रुपये एक साथ बैंकों को मिलने जा रहे हैं। उसके आने के बाद अब कारपोरेट घरानों को कर्जे देने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही सबसे बड़ा काम सरकार उनके कर्जों को माफ करने के जरिये करेगी। जो 8 लाख करोड़ के आस-पास एनपीए के तौर पर मौजूद है।
अभी रुपये जमा होने की प्रक्रिया जारी है। उसके बीच ही सरकार ने इस काम को शुरू भी कर दिया है।
63 धनकुबेरों के 7 हजार करोड़ रुपये की माफी उसी का हिस्सा है। जिसमें भगोड़े माल्या के 1200 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। जिस शख्स की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी सरकार उसे पुरस्कृत कर रही है।
ओएनजीसी मामले में जुर्माना न भरने की छूट देकर अंबानी को सरकार ने नया तोहफा दिया है।
आपको याद होना चाहिए कि अंबानी ने ओएनजीसी से 30 हजार करोड़ रुपये की गैस चोरी की थी। उसी मामले में अंबानी पर जुर्माना लगा था। इसके पहले ग्रीन ट्रिब्यूनल के अडानी पर लगे 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को सरकार पहले ही माफ कर चुकी है।
इतने बड़े-बड़े घड़ियालों को पकड़ने की जगह अगर उन्हें फायदा पहुंचाया जा रहा है तो पूरी कयावद किसके लिए है। झींगा और छोटी मछलियों के लिए? या फिर दो जून की रोटी को तरस रहे उन लोगों के लिए जो कतारों में खड़े होकर जान दे रहे हैं?


