56 महीने में कुछ बचा हो तो बचा लो...
56 महीने में कुछ बचा हो तो बचा लो...
देश के कई संस्थान ऐसे हैं, जो 56 महीने पहले तक कुल मिला कर राजनीति से परे भले ही न हों लेकिन किसी मकान के दरवाजे पर बंधे हुए तो कतई नहीं थे..
आज मीडिया, बराए मेहरबानी अम्बानी और राज्यसभा का चुग्गा..लैंप पोस्ट के नीचे खड़े होने को को अभिशप्त है..
शेषन के समय का और उसके बाद लंबे समय तक शेर की तरह दहाड़ने वाला चुनाव आयोग आज दुम दबाये गीदड़ों के सामने किकिया रहा है.. (ध्यान रहे कि चुनाव आयोग को शेर की दहाड़ राजीव गांधी की देन है.. क्योंकि चुनाव आयोग को पूरे अधिकार देते हुए इसका कामकाज टीएन शेषन को सौंपा था..)
जबकि अब तक अपनी निष्पक्ष छवि और कड़े तेवरों के लिए जाना माना सुप्रीम कोर्ट इधर कई सालों से रिश्वत और भ्रष्ट फसलों से गुलज़ार है.. बल्कि अब तो वह यही तय नहीं कर पा रहा कि वो कचहरी है या सेशन कोर्ट है या हाईकोर्ट से कितना अलग है..
बचा सीबीआई, तो पहले उसके पास कोई शाख तो थी.. आज न वो जल में है न नभ और न थल में..
और आरबीआई !! रिजर्व बैंक अब किस काम का रहा.. जो उस पर समय बरबाद करूँ.. इसलिए हेडिंग उसी पर है..
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