7 दिसम्बर, आज ही हुआ था मैसूर के शासक हैदर अली का निधन
7 दिसम्बर, आज ही हुआ था मैसूर के शासक हैदर अली का निधन
7 दिसम्बर, आज ही हुआ था मैसूर के शासक हैदर अली का निधन
इतिहास के झरोखे से 7 दिसम्बर “तारीख गवाह है“ डीबीलाइव के साथ
DBLIVE || 17 December 2016 | Taarikh Gawah Hai
7 दिसम्बर 1782 को मैसूर के शासक हैदर अली का निधन हुआ था।
मैसूर के मुस्लिम शासक और सेनापति के रूप में हैदर अली ने 18वीं शताब्दी के मध्य में दक्षिण भारत में हुए युद्धों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसी दौरान अपनी क़ाबलियत और कूटनीति के बल पर हैदर अली मैसूर के शासक बनें।
हैदर अली को बड़ी कठिन स्थिति का सामना भी करना पड़ा।
हैदराबाद के निज़ाम, मराठे और अंग्रेज़ सभी उनके शत्रु बन गए थे।
इन तीनों ने 1766 में हैदर के खिलाफ संधि कर ली, लेकिन हैदर अली ने अपनी चतुराई के बल पर दोबारा मराठों को अपनी ओर मिला लिया और फिर अंग्रेज़ों और निज़ाम से जमकर लोहा लिया।
महान योद्धा टीपू सुल्तान हैदर अली के ही पुत्र थे।
पिता के निधन के बाद टीपू ने मैसूर की कमान संभाली थी।
जापानी वायुसेना ने आज ही अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर किया था हमला
7 दिसम्बर 1941 में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापानी वायुसेना ने हवाई के पर्ल हार्बर स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर अचानक हमला कर ब्रिटेन व अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की थी।
हमले में छह जंगी जहाज़, 112 नौकाएं और 164 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए थे और 2400 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। यह हमला अमेरिका के लिए बेहद चौंकाने वाला था, क्योंकि उस दौरान वॉशिंगटन में जापानी प्रतिनिधियों की तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री कॉर्डेल हल के साथ जापान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म करने को लेकर बातचीत चल रही थी।
अमेरिका ने यह प्रतिबंध चीन में जापान के बढ़ते हस्तक्षेप के बाद लगाए थे। जापान ने 1931 में उत्तरी चीन के मंचूरिया पर कब्ज़ा जमा लिया था। उसके बाद से ही जापान और अमेरिका के संबंधों में खटास आ गई और 1940 में अमेरिका ने जापान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था।
2001 में आज ही के दिन तालिबान शासन ने कंधार का अपना गढ़ छोड़ दिया और इस तरह अफ़ग़ानिस्तान में 61 दिन की लड़ाई खत्म हो गई।
अफ़ग़ानिस्तान के नए अंतरिम प्रशासन के प्रमुख हामिद करज़ई और तालिबान शासन के बीच हुए समझौते के आधार पर ही कट्टरपंथी तालिबान अपने धार्मिक गढ़ कंधार को छोड़ने के लिए तैयार हुए थे।
हालांकि अमेरिका इस समझौते के उन प्रावधानों से नाराज़ था, जिसमें तालिबानी नेता मुल्ला उमर को संरक्षण देने की बात कही गई थी।
अमेरिका ने कहा कि, अगर मुल्ला उमर को किसी तरह का संरक्षण दिया गया, तो अफ़ग़ानिस्तान और अमेरिका के रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा और अमेरिका सैन्य और वित्तीय मदद का अपना वादा पूरा नहीं कर सकेगा।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा कई हफ़्तों की बमबारी के बाद तालिबान का पतन हो गया था। तालिबान ने राजधानी काबुल और जलालाबाद नवंबर महीने में ही छोड़ दिया था।
7 दिसम्बर भारत में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
सशस्त्र सेना झंडा दिवस भारतीय सशस्त्र सेना के कर्मियों के कल्याण हेतु भारत की जनता से धन के संग्रह के प्रति समर्पित एक दिन है।
भारत सरकार ने साल 1949 से सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाने का फैसला लिया था।
देश की सुरक्षा में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों के कल्याण हेतु सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है।
शुरुआत में इसे झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन 1993 से इसे सशस्त्र सेना झंडा दिवस का रूप दे दिया गया।


