पसमांदा मुसलमानों के लिए भाजपा से 4 ठोस मांगें, SC-OBC आरक्षण से महिला प्रतिनिधित्व तक

  • पसमांदा समाज के सशक्तिकरण के लिए भाजपा से क्या हैं चार प्रमुख मांगें?
  • पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए SC सूची में शामिल करने की मांग
  • OBC मुस्लिम बिरादरियों के लिए 4% उप-कोटे की मांग
  • मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी
  • गरीब अशराफ जातियों के लिए EWS में अलग प्रावधान
  • ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और पसमांदा समाज

पसमांदा समाज को साथ लिए बिना समावेशी विकास संभव है?

पिछले कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी पसमांदा मुस्लिम समाज को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आज ऐसा प्रतीत होता है कि पसमांदा मुसलमानों की सबसे बड़ी हितैषी पार्टी भाजपा ही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और सम्मान - ये किसी भी नागरिक के विकास की बुनियाद हैं, और एक समावेशी समाज के निर्माण में हर समुदाय की भागीदारी अनिवार्य है। इसीलिए पसमांदा समाज का सशक्तिकरण, समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ज़मीनी स्तर पर आज यह महसूस किया जा रहा है कि पसमांदा मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के मुद्दों को सबसे अधिक गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ भाजपा ने ही उठाया है। आज भाजपा देश की सबसे बड़ी और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति है। ऐसे में यदि पार्टी इसी इच्छाशक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो मुस्लिम समाज विशेषकर पसमांदा समाज के लिए ठोस और दीर्घकालिक बदलाव लाना पूरी तरह संभव है।

"सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" - इस मूल मंत्र को धरातल पर साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि भाजपा मुस्लिम अल्पसंख्यकों सहित सभी अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए समावेशी, न्यायसंगत और संवेदनशील नीतियों पर दिल से कार्य करे। भाजपा देश की सबसे बड़ी और प्रभावशाली पार्टी है। यदि वह चाहे तो मुस्लिम समाज, विशेषकर पसमांदा समाज का वास्तविक भला कर सकती है। इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी से से हमारी 4 ठोस मांगें हैं:

1. पसमांदा SC बिरादरियों को SC सूची में शामिल किया जाए

पसमांदा समाज की धोबी, दुनियां, मंसूरी, नट, हलालखोर, भंगी इत्यादि जैसी कई बिरादरियां सामाजिक और शैक्षणिक रूप से आज भी दलितों से बदतर स्थिति में हैं। हिंदू और सिख दलितों को जो संवैधानिक अधिकार और आरक्षण प्राप्त हैं, वही अधिकार इन मुस्लिम दलित बिरादरियों को भी मिलना चाहिए। "धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं" का तर्क अब पर्याप्त नहीं है। संविधान में संशोधन कर इन बिरादरियों को SC सूची में शामिल किया जाए।

2. ओबीसी मुस्लिम बिरादरियों के लिए OBC के भीतर 4% उप-कोटा

ओबीसी सूची में शामिल मुस्लिम बिरादरियां, पिछड़ेपन और अवसरों की कमी के कारण हिंदू OBC समाज से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं। इसलिए OBC आरक्षण के भीतर इनके लिए 4% का अलग उप-कोटा आरक्षित किया जाए।

3. मुस्लिम महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और राजनीति में विशेष प्रावधान

भाजपा सरकार मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की बात सबसे मुखरता से करती है। यदि यह प्रतिबद्धता वास्तविक है तो मुस्लिम महिलाओं के लिए शिक्षा, सरकारी नौकरी और पंचायत से लेकर संसद तक राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अलग से प्रावधान किया जाए।

4. मुसलमानों की ग़रीब अशराफ/सवर्ण जातियों को EWS में अलग से कोटे का प्रावधान किया जाए

भाजपा जैसी महान पार्टी से हमारी विनम्र गुजारिश है कि वह इन मांगों पर गंभीरता से विचार करे। और उन लोगों की धारणाओं को खारिज करे जो यह भ्रम फैलाते हैं कि "पसमांदा नैरेटिव" केवल मुसलमानों को बांटने के लिए है।

याद रखिए, पसमांदा मुस्लिम, मुस्लिम समाज का 85% हिस्सा हैं। इन्हें साथ लिए बिना "सबका साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास" का सपना अधूरा है। अगर भाजपा वास्तव में "सबका विश्वास" चाहती है, तो शुरुआत पसमांदा से होनी चाहिए।

डॉ. मोहम्मद अकरम नवाज़,

सहायक आचार्य,

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,

नई दिल्ली