जन आंदोलनों को धर्म के चश्मे से देखना आत्मघाती और राष्ट्रघाती... जब आप जैसी जनता होगी तो कोई भी शासक, तानाशाह बन ही जायेगा
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जन आंदोलनों को धर्म के चश्मे से देखना आत्मघाती और राष्ट्रघाती... जब आप जैसी जनता होगी तो कोई भी...

जन आंदोलनों को धर्म के चश्मे से देखना आत्मघाती और राष्ट्रघाती... जब आप जैसी जनता होगी तो कोई भी शासक, तानाशाह बन ही जायेगा

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