अंबेडकर के खिलाफ संघ का घृणा अभियान - विष्णु भागवान के कल्कि अवतार के बाद अब अंबेडकर अवतार का खुल्ला आवाहन

पांचजन्य के अंबेडकर विशेषांक पर विवाद क्यों खड़ा हुआ?

  • क्या संघ परिवार अंबेडकर की वैचारिकी का पुनर्पाठ कर रहा है?
  • अंबेडकर, हिंदुत्व और मुसलमान प्रश्न: इतिहास बनाम राजनीतिक व्याख्या
  • गुरु गोलवलकर और अंबेडकर की तुलना का राजनीतिक अर्थ
  • बहुजन राजनीति, ओबीसी विमर्श और हिंदुत्व की नई रणनीति
  • अंबेडकर की जाति उन्मूलन परियोजना बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
  • दलित प्रतीकों के राजनीतिक appropriation पर बहस क्यों जरूरी है?
  • संघ, अंबेडकर और इतिहास लेखन: तथ्य, मिथक और प्रचार
  • क्या अंबेडकर को हिंदुत्व आइकन बनाने की कोशिश हो रही है?

लोकतंत्र, संविधान और बहुजन आंदोलन के सामने नई चुनौतियां

धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।

ओबीसी नरेंद्र भाई मोदी के प्रधानमंत्रित्व के परमाणु बम से बाकी विध्वंस जो बहुजनों का हो रहा है, जो शत प्रतिशत हिंदुत्व की सुनामी और विदेशी पूंजी के हितों में सोने की चिड़िया को बेचने की मुहिम है और जो देश को परमाणु भट्टी बनाकर बहुजनों को जिंदा सींख कबाब बनाने की तैयारी है, सो ग्लोबल हिंदुत्व, अमेरिकी साम्राज्यवाद और जायनी इजराइली इस्लाम विरोधी जिहाद के त्रिशूल की अलौकिक लीला है, इससे बड़ी बात भारत की आधी आबादी ओबीसी अब केसरिया कबंध हैं, जिन्हें हम बजरंगी कहते हैं।

जो असली आबादी है, यानी भारत की आधी जनसंख्या महिला, वह हिंदी साम्राज्यवादी पुरुषतांत्रिक व्यवस्था में यौनदासी के सिवाय कुछ भी नहीं है। अब बाकी आबादी की शामत है और इस शामत को कयामत बनाने के लिए भारत फिर महाभारत है।

धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।

संघ परिवार के पांज्यजन्य विशेषांक में अंबेडकर को मुसलमानों के खिलाफ विषवमन करते दिखाया गया है और उन्हें हिंदुत्व के उत्थान में गुरु गोलवलकर से भी बहुत ऊपर दिखाया गया है।

विष्णु भागवान के कल्कि अवतार के बाद अब अंबेडकर अवतार का खुल्ला आवाहन है।

इस सिलसिले में हम पहले ही चेतावनी जारी कर चुके हैं। देखें हस्तक्षेपः

हिंदू साम्राज्यवाद के सबसे बड़े शत्रु डॉ. अंबेडकर का जन्मदिन किसी पुण्य पर्व की तरह क्यों मना रहा है संघ परिवार ?

संघ परिवार के हिंदू राष्ट्र एजेंडा में बाबा साहेब की प्रासंगिकता क्या है?

मुक्तबाजारी हिंदू साम्राज्यवादियों के शिकंजे में बाबासाहेब

उनकी रिहाई के लिए संघ-परिवार और कांग्रेस की तर्ज पर अंबेडकर जयंती न मनाकर उनकी विचारधारा, उनके जाति उन्मूलन एजंडा और उनके आंदोलन की जयंती मनायें.

अब देखें पांच्यजन्य का अंबेडकर विशेषांकः

“विवेक शुक्ला - भीमराव ऑबेडकर ने पंडित नेहरू की कैबिनेट से 31 अक्तूबर,1951 को इस्तीफा दे दिया था और उसके अगले ही दिन वे 26 अलीपुर रोड के बंगले में आ गए थे। आप जब राजधानी में अन्तरराष्ट्रीय बस अड्डे के रास्ते सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन की तरफ बढ़ते हैं तो आपको .. आगे पढ़िए…”

26 अलीपुर रोड- जहां गुजरे थेबाबासाहेब के अंतिम दिन......

हमने इस ऐतिहासिक विकृति का खंडन करने का फैसला किया है। इस सिलसिले में हमारी सबसे पहले बातचीत आदरणीय राम पुनियानी जी से हुई है। सुबह ही हमने अमलेंदु से बात कर ली है। हम इतिहासकारों और दूसरे विशेषज्ञों के आलेखों और मतामत का स्वागत तो करेंगे ही, इस बहस में आप सबका स्वागत है।

हम घृणा अभियान के सख्त खिलाफ हैं। तथ्यात्मक तार्किक मतामत के लिए हस्तक्षेप पर किसी का भी स्वागत है।

मुसलमानों और बहुजनों, खासकर दलितों और अंबेडकर के अनुयायियों से निवेदन है कि वे सच का सामना करें।

संघ परिवार कितना सच बोल रहा है और कितना झूठ, इसकी चीरफाड़ अवश्य हो।

अगर अंबेडकर के विचार सचमुच हिंदुत्व के फासीवाद के पक्ष के मजबूत करते हैं, तो हमें तुरंत ही अंबेडकर की सारी मूर्तियों को विसर्जित कर देना चाहिए और नीले झंडे को फेंक देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है, तो आइए सामना करें हिंदुत्व की इस कयामती दुष्प्रचार सुनामी का।

पलाश विश्वास