अब तो रातें भी नहीं ठंडी: क्यों भारत में गर्मी बनती जा रही है ज्यादा खतरनाक
भारत में अब सिर्फ दिन नहीं, रातें भी खतरनाक रूप से गर्म हो रही हैं। जानिए क्यों बढ़ रही है हीटवेव, क्या कहती है नई रिपोर्ट, और कैसे बदल रहा है भारत का मौसम।;
अब तो रातें भी नहीं ठंडी, क्यों हो रही है भारत में गर्मी ज्यादा खतरनाक
- भारत में अब रातें भी दे रहीं ‘हीट स्ट्रेस’, क्यों खतरनाक होती जा रही है गर्मी
- 48 डिग्री दिन, 30 डिग्री रात: भारत की बदलती गर्मी का डरावना सच
- दिन ही नहीं, रातें भी झुलसा रहीं: भारत में हीटवेव का नया संकट
- गर्मी अब ‘अनएस्केपेबल’ क्यों हो रही है? भारत की तपती रातों की कहानी
भारत में बढ़ती गर्म रातें: जलवायु संकट का नया चेहरा
नई दिल्ली, 23 मई 2026. उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री तक पहुंच चुका है। दोपहर में सड़कें खाली हैं। हवा चलती भी है तो ऐसे, मानो चेहरे पर हेयर ड्रायर चला दिया गया हो।
मगर इस बार कहानी सिर्फ दिन की गर्मी की नहीं है। असली डर रात में छुपा है। रात, जो कभी राहत हुआ करती थी।
अब कई शहरों में रात का तापमान भी 30 डिग्री के करीब पहुंच रहा है। लोग पसीने में सो रहे हैं। पंखे चल रहे हैं, मगर शरीर ठंडा नहीं हो रहा। सुबह उठने से पहले ही थकान शुरू हो जा रही है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट “Why India’s heatwaves feel more brutal than before” बताती है कि भारत की गर्मी अब सिर्फ “हॉट” नहीं रही, बल्कि “अनएस्केपेबल” होती जा रही है।
यानी ऐसी गर्मी जिससे निकलने की जगह कम होती जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के “कोर हीटवेव ज़ोन”, जिसमें राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के हिस्से शामिल हैं, वहां हीटवेव की आवृत्ति और अवधि दोनों बढ़ रही हैं। IMD के आंकड़े बताते हैं कि 1961 से अब तक इन इलाकों में हीटवेव की आवृत्ति हर दशक 0.1 दिन बढ़ी है, जबकि इसकी अवधि 0.44 दिन प्रति दशक बढ़ी है।
सुनने में ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं। मगर मौसम विज्ञान में दशकों के हिसाब से होने वाले ऐसे बदलाव पूरे समाज का व्यवहार बदल देते हैं। खेती, बिजली की मांग, मजदूरों की क्षमता, अस्पतालों का दबाव, सब कुछ।
रिपोर्ट कहती है कि भारत की औसत रात की गर्मी भी तेजी से बढ़ रही है। 2010 से 2024 के बीच देश में औसत न्यूनतम तापमान लगभग 0.21 डिग्री प्रति दशक बढ़ा है। 36 में से 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रातें गर्म हो रही हैं।
WHO की गाइडलाइन कहती है कि घर के भीतर तापमान लगातार 24 डिग्री से ऊपर नहीं होना चाहिए, वरना नींद, दिल और शरीर की रिकवरी पर असर पड़ता है। लेकिन भारत के कई हिस्सों में रात का तापमान अब उससे काफी ऊपर जा चुका है।
यही वजह है कि अब लोग सिर्फ दिन में नहीं, रात में भी “हीट स्ट्रेस” झेल रहे हैं।
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत कहते हैं कि अभी देश के ऊपर कोई बड़ा मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है। किसी भी मौसम प्रणाली की अनुपस्थिति में, पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र और राजस्थान के रेगिस्तान से आने वाली गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाएँ देश के भीतर गहराई तक प्रवेश कर रही हैं। पिछले तीन से चार दिनों से लगातार चल रही इन हवाओं के कारण तापमान बढ़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लू से लेकर भीषण लू तक की स्थिति बनी हुई है। जब दिन गर्म होते हैं और शाम को मानसून से पहले की कोई गतिविधि नहीं होती है, तो ये उच्च तापमान रात के तापमान में भी वृद्धि का संकेत देते हैं। वर्तमान मौसम की स्थिति को मई के दौरान सामान्य मौसमी पैटर्न माना जाता है, जो ग्रीष्म ऋतु का चरम भी होता है। पश्चिमी विक्षोभ के आने से ही हमें कुछ राहत मिलेगी, जिससे हवा का पैटर्न बदल जाएगा और बहुत जरूरी राहत मिलेगी।