विश्व रक्तदाता दिवस 2026: रक्त की सुरक्षा और उपलब्धता में सुधार के बावजूद निम्न-आय वाले देशों में संकट बरकरार – WHO रिपोर्ट

WHO की नई रिपोर्ट के अनुसार रक्तदान में प्रगति हुई है, लेकिन निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता अब भी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है;

By :  Hastakshep
Update: 2026-06-13 03:23 GMT

World Blood Donor Day 2026: WHO Report

WHO रिपोर्ट: सुरक्षित रक्त तक समान पहुँच अब भी चुनौती, करोड़ों लोगों की जान जोखिम में

  • विश्व रक्तदाता दिवस 2026: रक्तदान बढ़ा, लेकिन सुरक्षित रक्त की उपलब्धता में भारी असमानता
  • रक्तदान में प्रगति के बावजूद सुरक्षित रक्त की कमी क्यों बनी हुई है? WHO की नई रिपोर्ट

WHO की चेतावनी: सुरक्षित रक्त तक पहुँच में वैश्विक असमानता बनी हुई है

एक यूनिट रक्त कई ज़िंदगियाँ बचा सकता है। WHO की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में स्वैच्छिक रक्तदान बढ़ा है, लेकिन सुरक्षित रक्त तक समान पहुँच अब भी करोड़ों लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। आखिर किन देशों में सबसे अधिक संकट है और इसके पीछे क्या कारण हैं? संयुक्त राष्ट्र समाचार की इस खबर से जानिए रिपोर्ट की प्रमुख बातें।

रक्त की सुरक्षा व उपलब्धता में धीमी प्रगति, मगर मौजूदा कमियाँ चिन्ता की वजह

12 जून 2026 स्वास्थ्य

हर दिन, सुरक्षित रक्त के ज़रिए प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना कर रही महिलाओं, दुर्घटना में घायल हुए लोगों, कैंसर मरीज़ों और लम्बी बीमारियों की चपेट में आए व्यक्तियों के जीवन की रक्षा करने में मदद मिलती है. मगर, जीवनरक्षक रक्त तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कई दशकों से हो रहे प्रयासों के बावजूद अब भी असमानता बरक़रार है और अक्सर निम्न-आय वाले देशों में इस स्थिति में ज़िन्दगियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 14 जून को ‘विश्व रक्त दान दिवस’ से ठीक पहले जारी की गई एक नई रिपोर्ट में इस विषय में नवीनतम जानकारी साझा की गई है.

इस वर्ष, विश्व रक्तदाता दिवस की थीम है: मानवता की एक बूँद. रक्त दान कीजिए. ज़िन्दगियाँ बचाइए.

संगठन के अनुसार, विश्व भर में रक्त दान प्रक्रिया की देखरेख व्यवस्था की यह अब तक की सबसे व्यापक समीक्षा है, जिसमें 168 देशों से आँकड़े लिए गए हैं, यानि वैश्विक आबादी का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा.

रिपोर्ट के अनुसार, रक्त दान और सुरक्षा में काफ़ी हद तक प्रगति दर्ज की गई है. दुनिया भर में रक्त दान के 85 प्रतिशत से अधिक मामले, स्वैच्छिक, बिना किसी भुगतान के किए जाते हैं. यह रक्त दान का सबसे सुरक्षित और सतत स्रोत माना जाता है.

असमान प्रगति

अनेक देशों में राष्ट्रीय रक्त प्रणालियों को मज़बूती दी गई है और सुरक्षित ढंग से रक्त चढ़ाने के लिए भी व्यवस्था की गई है, लेकिन कमज़ोर रखरखाव, प्रक्रियाओं और अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों की वजह से निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में इसकी क़िल्लत भी है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, लेकिन अनेक देशों में हर एक व्यक्ति की सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों तक पहुँच नहीं है.

कई प्रकार की स्वास्थ्य अवस्थाओं में प्रभावित व्यक्ति को रक्त देना अनिवार्य हो जाता है. जैसेकि बच्चे के जन्म के दौरान गर्भवती महिला या कैंसर की आपात सर्जरी के दौरान होने वाला रक्तस्राव. इसके अलावा, रक्त की कमी और अन्य व्याधियों की वजह से भी ख़ून चढ़ाने की आवश्यकता होती है.

दान किए गए प्लाज़मा का इस्तेमाल दवाएँ बनाने में किया जाता है. यह रक्त का तरल हिस्सा होता है, जोकि रक्तस्राव विकारों, प्रतिरक्षण तंत्र की कमियों, और अन्य गम्भीर स्थितियों में सहायक साबित हो सकता है.

यदि सुरक्षित रक्त जल्द उपलब्ध नहीं होता है, तो व्यक्ति की उपचार योग्य बीमारियों या चोट से मौत हो सकती है.

एक बड़ी चुनौती

यूएन एजेंसी के अनुसार, अनेक देशों में ठोस शासन व्यवस्था का अभाव और वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता, राष्ट्रीय रक्त सेवों के कमज़ोर होने की एक बड़ी वजह है.

WHO के अनुसार, सभी तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह ज़रूरी है कि राजनैतिक संकल्प लिया जाए, राष्ट्रीय प्रणालियों को मज़बूती दी जाए और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिले.

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